राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राहुल गांधी की खाटसभा में भी कांग्रेस जातिगत आधार को आगे रखकर चल रही है। पार्टी के राजनीतिक रणनीतिकार प्रशांत किशोर के निर्देशन में शुरू हुए इस आयोजन में जिन किसानों, मजदूरों, युवाओंं को शामिल होने का मौका मिल रहा है, उसमें मुस्लिम, ब्राह्मण, पिछड़ा और दलित की बराबर की भागेदारी रखी जा रही है।
देवरिया से दिल्ली तक के लिए बनाई गई योजना में पीके की टीम इस फार्मूले पर पूरा ध्यान रखे हुए है। पीके ने खाटसभा की जो रूपरेखा तैयार की है, उसमें कुछ राहुल गांधी बोलते हैं, कुछ किसान सवाल करते हैं और फिर राहुल जवाब देते हैं। राष्ट्रीय उपाध्यक्ष से सवाल करने वाले कौन होंगे, इसके चयन की प्रक्रिया भी काफी मजेदार और जटिल है।
जिस जगह पर खाटसभा होती है, वहां करीब सप्ताह भर पहले पीके की टीम सर्वे पर पहुंच जाती है। पहले तो ऐसे किसानों का चयन किया जाता है, जो सही तरीके से अपनी बात रख सकें। फिर उन्हें प्रशिक्षित किया जाता है कि उसे कितनी देर और क्या बोलना है। यह भी कि राहुल गांधी जब उसका उत्तर दें तो उसमें किसी तरह का तर्क भी न किया जाए। प्रश्न करने वालों के चयन की सबसे बड़ी बात यह होती है कि इसमें उन्हीं जातियों से जुड़े लोगों को आगे रखा जाता है, जहां पर जिसका जनाधार होता है।
पीके टीम के एक सदस्य के अनुसार यह सब व्यवस्था बनाने के लिए किया जा रहा है। घाटमपुर में सबसे पहले सलीम अहमद को राहुल गांधी से सवाल करने का मौका दिया गया। इसके बाद ब्रज किशोर दीक्षित को माइक दिया गया। फिर बारी आई अनूप सोनकर, शिव किशोर की और आखिर में वैभव दीक्षित ने राहुल से सवाल किया। सभी ने अपनी अपनी परेशानी बताते हुए इसे दूर करने की मांग उठाई। इस दौरान मंच पर श्रीप्रकाश जायसवाल, राजाराम पाल, अजय कपूर, अभिजीत सिंह सांगा, नीतम सचान, भूधर नारायण मिश्र, जुबैर अहमद मौजूद रहे।