इटावा। एक घंटे पहले महोबा के अस्पताल में भर्ती बेटे से माता-पिता ने बात की थी। उसके बाद जब दोबारा फोन पहुंचा तो उसे माता-पिता की मौत की सूचना मिली। हादसे की जानकारी के बाद कोहराम मच गया।
हमीरपुर जिले के थाना बिमार के पारा गांव निवासी बाबू लाल ने बताया कि बुधवार सुबह उसके पास शिवनारायण के बड़े बेटे रामनारायण ने फोन से सूचना दी। उसके पिता शिवनारायण, मां शोभारानी और बाबू लाल के पिता रामऔतार की हादसे में मौत हो गई। राम नारायण किडनी की बीमारी के कारण महोबा के अस्पताल में भर्ती है।
उसका एक छोटा भाई पुष्पेंद्र है। वह भी महोबा जिले के खरैला थाना के एचाना गांव में ही घर पर है। बाबू लाल अपने परिजनों के साथ पोस्टमार्टम हाउस पहुंचा। रामनारायण ने बाबू लाल को फोन पर बताया कि सुबह साढ़े पांच बजे माता-पिता से बात हुई थी। उन्होंने बताया था कि वह इटावा के पास पहुंच गए हैं।
ठीक एक घंटे बाद पिता के फोन से पुलिस का फोन आया। उन्होंने माता-पिता सहित चार लोगों की मौत होने की जानकारी दी। इससे पूरा परिवार सदमे में है। बाबूलाल ने बताया कि शिवनारायण की छोटी बेटी ओमा उसकी पत्नी है। दोनों के परिवार के लोग दिल्ली के राम विहार में रहकर मजदूरी करते हैं। करीब छह साल से दिल्ली में रह रहे हैं।
तेज आवाज आई और गाड़ी रुक गई
शिवनारायण की बेटी सुमन (28) भी अपने पति रामबाबू के साथ दिल्ली में रहती है। उसका पति भी दिल्ली में मजदूरी करता है। मां-बेटी राशि का इलाज मेडिकल कॉलेज में चल रहा है। हादसे में सुमन का बेटा जितेंद्र सुरक्षित है। उसने जिला अस्पताल में बताया कि वह सो रहा था। अचानक तेज आवाज आई और गाड़ी रुक गई और सब लोग गाड़ी में फंस गए। वह अपनी मां के साथ सबसे पीछे वाली सीट पर बैठा था। उधर, मेरठ निवासी मोहन लाल गुप्ता ने बताया कि उनका बेटा आशू सबसे बड़ा था, छोटे बेटे का नाम शनि और बेटी का नाम मुस्कान है। वह परचून की दुकान चलाते हैं। हादसे के बाद मां सीमा देवी का रो-रोकर बुरा हाल है।
हाईवे किनारे अवैध पार्किंग
से आए दिन हो रहे हादसे
- एक माह में चली गई पांच लोगों की जान
संवाद न्यूज एजेंसी
इटावा। हाईवे किनारे गलत तरीके से खड़े किए गए वाहन जानलेवा साबित हो रहे हैं। एक माह में ऐसे ही खड़े वाहनों ने पांच लोगों की जान ले ली। औपचारिकता पूरी करने के लिए सड़क सुरक्षा समिति की बैठक भी होती हैं। लेकिन धरातल पर इनका कोई असर नहीं दिख रहा है।
ज्यादातर हादसे हाईवे पर होटल-ढाबों के पास हुए हैं। पुलिस व प्रशासन का इस ओर जरा भी ध्यान नहीं है। ट्रैफिक नियमों के मुताबिक कोई भी वाहन मुख्य मार्ग से 52 फीट दूर खड़ा करने की इजाजत है, लेकिन शहर ही नहीं, जिले में कहीं इस नियम पर अमल नहीं होता। चालक अपनी सुविधा और जगह देखकर ट्रक और डंपर खड़े कर देते हैं। पिछले एक माह में अबतक हाईवे पर खड़े वाहनों से टकराकर पांच लोगों की मौत हो गई। कई लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। पुलिस ने वाहन चालकों के खिलाफ अपराध तो दर्ज किया, लेकिन इसकी पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए कोई इंतजाम या कार्रवाई नहीं की। नतीजा यह कि हादसों का दौर जारी है। बीती 24 जुलाई को बकेवर थाना क्षेत्र के बिजौली ओवरिब्रिज के पहले हाईवे किनारे खड़े एक डंपर में पीछे से डीसीएम घुस गई थी। जिसमें हिमाचल प्रदेश के सोलन जनपद के बद्दी थाना के गांव भुड निवासी चालक रविंद्र सिंह उर्फ रवि की मौत हो गई थी। वहीं 23 जुलाई को इकदिल क्षेत्र के मनियामऊ गांव के पास हाईवे पर खड़े डंपर में डीसीएम घुसने से फिरोजाबाद का चालक बुरी तरह से घायल हो गया था। बुधवार सुबह पिलखर गांव के पास हाईवे किनारे खड़े ट्रक से चार लोगों की जान चली गई।