भीषण गर्मी में हालात ऐसे हैं कि हर कण्ठ को तलाश है पानी की, चाहे वह पशु-पक्षी हों या फिर हम इंसान... हम सभी में उतनी तो संवेदनशीलता होनी ही चाहिए कि पशु- पक्षियों को दाना-पानी की कहीं कोई समस्या नहीं आए। दाना-पानी के अभाव में अगर कोई पशु या पक्षी तड़पता है, भीषण गर्मी का शिकार होकर भूख और प्यास से दम तोड़ देता है तो हमारी संवेदना ऐसों की मदद के लिए जरूर होनी चाहिए।
कानपुर के फूलबाग एलआईसी चौराहा पर बुधवार को परिंदों के लिए लोगों में संवेदना दिखी। यहां पड़ रही 43 डिग्री की भीषण गर्मी में ये महिलाएं घरों से निकली। सीधे बाजार गई और पक्षियों के लिए मिट्टी के बर्तन खरीदकर लाईं। इसके बाद ये एलाईसी चौराहा रेडलाइट पर पहुंची जहां उन्होंने मिट्टी के बर्तनों में ठंडा पानी भरकर रखा और पक्षियों के लिए दाना भी डाला।
कानपुर में बिरहाना रोड के नजदीक रहने वाली रसना गुप्ता, शुभी रस्तोगी, पवेला गुप्ता तीनों एक दूसरे से परिचित हैं। ये तीनों लंबे समय से यहां आकर पक्षियों के लिए दाना-पानी डालती हैं। इस बारे में जब उनसे बातचीत की तो पशु-पक्षियों के प्रति उनकी संवेदनाओं के बारे में जानने को मिला।
ये कहती हैं रोजाना यहां परिंदों को दाना पानी देने आते हैं। साथ में हमारे बच्चे भी यहां आते थे लेकिन आज गर्मी ज्यादा बढ़ गई थी तो उन्हें साथ लेकर नहीं आए हैं। इनका कहना है समाज में रहने वाले सभी लोगों को इस और ध्यान देना चाहिए। पवेला गुप्ता बोलीं परिंदों को भी हमें अपने घरों के सदस्य की तरह समझना चाहिए। इनके बिना जीवन अधूरा है।