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चंद्रग्रहण आज, भूलकर भी न करें ये काम, इन राशियों के जातक रहें सबसे ज्यादा सावधान

Fri, 27 Jul 2018 05:39 PM IST
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
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चंद्रग्रहण
गुरु पूर्णिमा के पर्व पर आज शताब्दी का सबसे बड़ा चंद्रग्रहण भी पड़ रहा है। इस कारण दोपहर 2:54 बजे से सूतक लग जाएगा। सूतक काल से पूर्व ही गुरु पूजन करना होगा। 

भारतीय विद्या भवन, कानपुर के वास्तुविद् और ज्योतिषी रमेश चिंतक का कहना है कि यह चंद्रग्रहण सबसे बड़ा होगा। इसका प्रभाव छह माह तक रहेगा। ऐसे में गुरु पूर्णिमा पर गुरु की पूजा के लिए उपयुक्त समय दोपहर से पूर्व का रहेगा।
 
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चंद्रग्रहण
सुबह से दोपहर 2:54 बजे तक गुरु चरणों का पूजन करना शुभ रहेगा। सूतक काल में पूजन का विधान नहीं है। 28 जुलाई से सावन लग रहा है। ऐसे में इस दिन भोर पांच बजे से मंदिरों के पट खुल जाएंगे।
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चंद्रग्रहण
चंद्रग्रहण पर एक नजर----
सूतक काल -दोपहर 2:54 बजे से शुरू
ग्रहण प्रारंभ-रात 11:54 बजे
ग्रहण समाप्ति-रात 3:49 बजे
 

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चंद्रग्रहण
ग्रहण के बारे में कुछ रोचक जानकारियां 
करीब 104 सालों बाद गुरु पूर्णिमा के दिन इतना लंबा ग्रहण लगेगा। ग्रहण की अवधि लगभग 4 घंटे रहेगी। यह ग्रहण कई मायनों में अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस दौरान जपा गया मंत्र सिद्धिपद होता है।  
 
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ग्रहण
12 घण्टे पहले ग्रहण का सूतक 
सिद्धपीठ श्री जंगली देवी मंदिर कानपुर के प्रधान पुजारी ज्योतिषाचार्य एवं वास्तुशास्त्री पंडित विजय पाण्डेय ने बताया कि  धर्मशास्त्रों के अनुसार चन्द्रग्रहण में ग्रहण से पूर्व 9 घंटे और सूर्य ग्रहण में 12 घण्टे पहले ग्रहण का सूतक लग जाता है। इसमें बालक वृद्ध और रोगी को छोड़कर अन्य लोगों के लिए भोजन निषिद्ध है।(इसका मतलब नही करना चाहिए)
 
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चंद्रग्रहण
यह पूर्ण चंद्रग्रहण सदी का सबसे लंबा और बड़ा चंद्रग्रहण है। इस ग्रहण को कम से कम तीन महाद्वीपों में देखा जा सकेगा। भारत के अलावा यह ग्रहण इंडोनेशिया, भूटान, म्यामार, पाकिस्तान, अफगानिस्तान, चीन, नेपाल, अफ्रीका, आस्ट्रेलिया, व अमेरिका के मध्य व पूर्वी भाग में दिखाई देगा। 
 
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चंद्रग्रहण
स्पर्श - रात्रि 11 बजकर 54 मिनट
सम्मिलन - रात्रि 1 बजे
मध्य - रात्रि 1 बजकर 52 मिनट
उन्मीलन - रात्रि 2 बजकर 44 मिनट
मोक्ष - रात्रि 3 बजकर 49 मिनट
ग्रहण का कुल पर्व काल - 3 घंटा 55 मिनट
 

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चंद्रग्रहण
भोजन निवृत्ति के साथ धार्मिक कृत्य करें
श्लोक:-
सूर्यग्रहे तु नाश्नीयात
पूर्वयाम चतुष्टयम्।
चन्द्रग्रहेतु यामास्त्रीन
बाल वृद्धातुरैर्विना।।
 

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चंद्रग्रहण
श्रद्धालु धार्मिक एवं जनमानस को (जनता को) धर्म शास्त्रीय वचन के अनुसार भोजन निवृत्ति के साथ साथ धार्मिक कृत्य, श्राद्ध, दान आदि भी करना चाहिए ।।
 

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चंद्रग्रहण
ग्रहण काल में इन बातों का रखें ध्यान
- ग्रहणकाल में प्रकृति में कई तरह की अशुद्ध और हानिकारक किरणों का प्रभाव रहता है। इसलिए कई ऐसे कार्य हैं जिन्हें ग्रहण काल के दौरान नहीं किया जाता है।
- ग्रहणकाल में सोना नहीं चाहिए। वृद्ध, रोगी, बच्चे और गर्भवती स्त्रियां जरूरत के अनुसार सो सकती हैं। 
- ग्रहणकाल में अन्न, जल ग्रहण नहीं करना चाहिए।
- ग्रहणकाल में यात्रा नहीं करनी चाहिए इससे दुर्घटनाएं होने की आशंका रहती है।
- ग्रहणकाल में स्नान न करें। ग्रहण समाप्ति के बाद ही स्नान करना चाहिए। 
- ग्रहण को खुली आंखों से न देखें। एेसा करने पर दुष्परिणाम भुगतना पड़ सकता है। 
- ग्रहणकाल के दौरान महामृत्युंजय मत्र का जाप करते रहना चाहिए। 
 

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चंद्रग्रहण
तांत्रिक विद्या करने वालों के लिए क्यों है उत्तम
ज्योतिषाचार्य ने बताया कि तांत्रिक विद्या करने वालों के लिए ये समय अति उत्तम होता है। क्योंकि ग्रहण के समय जपा गया मंत्र सिद्धिपद होता है।  
 

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चंद्रग्रहण
ग्रहण फल
1. मेष:- सुखम
2. वृष:- माननाश
3. मिथुन:- मृत्युतुल्य कष्ट
4. कर्क:- स्त्री पीड़ा
5. सिंह:- सौख्यम
6. कन्या:- चिन्ता
7. तुला:- व्यथा
8. वृश्चिक:- श्री प्राप्ति
9. धनु:- क्षति
10. मकर:- घात
11. कुम्भ:- हानि
12. मीन:- लाभ
 

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चंद्रग्रहण
गर्भवती स्त्रियां भूलकर भी न करें ये कार्य... 
- ग्रहण का सबसे अधिक असर गर्भवती स्त्रियों पर होता है। ग्रहण काल के दौरान गर्भवती स्त्रियां घर से बाहर न निकलें।
- बाहर निकलना जरूरी हो तो गर्भ पर चंदन और तुलसी के पत्तों का लेप कर लें। इससे ग्रहण का प्रभाव गर्भस्थ शिशु पर नहीं होगा।
 

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चंद्रग्रहण
- ग्रहण काल के दौरान यदि खाना जरूरी हो तो सिर्फ खानपान की उन्हीं वस्तुओं का उपयोग करें जिनमें सूतक लगने से पहले तुलसी पत्र या कुशा डला हो।
 
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चंद्रग्रहण
- गर्भवती स्त्रियां ग्रहण के दौरान चाकू, छुरी, ब्लेड, कैंची जैसी काटने की किसी भी वस्तु का प्रयोग न करें। इससे गर्भ में पल रहे बच्चे के अंगों पर बुरा असर पड़ता है।
- सुई से सिलाई भी न करें। माना जाता है इससे बच्चे के कोई अंग जुड़ सकते हैं।
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