फतेहपुर निवासी स्वाइन फ्लू के मरीज को तीन दिन पहले हैलट आईसीयू में भर्ती किया गया था। मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन विभाग के एक एसोसिएट प्रोफेसर उसका इलाज कर रहे थे। निजी पैथालॉजी ने जांच में उसके स्वाइन फ्लू की चपेट में आने की पुष्टि कर दी थी। 15 जनवरी की रात मरीज को संक्रामक रोग चिकित्सालय (आईडीएच) में शिफ्ट किया गया। हैलट के इमरजेंसी प्रभारी डॉ. प्रेम सिंह ने बताया कि बुधवार को उनकी ओपीडी में स्वाइन फ्लू के मरीज का इलाज कर रहे सीनियर डॉक्टर सहित दो मरीज ऐसे आए, जिनमें स्वाइन फ्लू जैसे लक्षण थे। यह सीनियर डॉक्टर मेडिसिन विभाग के ही एसोसिएट प्रोफेसर हैं।
डॉ. प्रेम सिंह ने बताया कि आईसीयू के सभी गंभीर मरीजों को एक साथ कहीं और शिफ्ट नहीं किया जा सकता। लिहाजा, बुधवार को आईसीयू के एक हिस्से मे फ्यूमीगेशन किया गया है। गुरुवार को दूसरे हिस्से और शुक्रवार को तीसरे हिस्से में फ्यूमीगेशन कराया जाएगा। स्वाइन फ्लू के मरीज का पता चलते ही बुधवार को स्वास्थ्य विभाग की टीम जिला महामारी वैज्ञानिक डॉ. देव सिंह के नेतृत्व में आईडीएच पहुंची। टीम ने मरीज का स्वास्थ्य परीक्षण किया।
आईडीएच के दोनों वेंटीलेटर खराब होने का पता चलते ही बुधवार को हैलट के प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डॉ. आरके मौर्या ने उनकी मरम्मत के लिए तकनीशियनों की टीम भेजी। डॉ. मौर्या ने बताया कि आईडीएच में वेंटीललेटर नौ महीने से बंद पड़े थे। उनकी मरम्मत कराई जा रही है। यदि वे ठीक नहीं हुए, तो हैलट से एक वेंटीलेटर और दो बाई-पैप मशीनें भेजी जाएंगी।
वेक्टर बॉर्न डिसीज विभाग के एसीएमओ एवं प्रभारी डॉ. आरएन सिंह ने बताया अभी तक एक ही मरीज को स्वाइन फ्लू होने का पता चला है। आईडीएच को अपने बजट से स्वाइन फ्लू की दवाएं मंगानी चाहिए, लेकिन उनकी मांग पर इस बीमारी में खिलाई जाने वाली टेमीफ्लू की गोलियां स्वास्थ्य विभाग की ओर से भेज दी गई हैं। अन्य अस्पतालों को भी दवा उपलब्ध करा दी गई है।