घटना के बाद आईपीएस पाटीदार फरार चल रहे थे, जिन पर एक लाख रुपये का ईनाम घोषित किया गया था। भगोड़ा घोषित होने के बाद लुकआउट नोटिस जारी किया गया। महोबा से लेकर प्रयागराज तक की पुलिस टीमें और एसटीएफ तक को लगाया गया।
राजस्थान में लोकेशन मिलने पर कई माह तक पुलिस टीमें डेरा जमाए रहीं, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली। इधर कोर्ट का दबाव बढ़ने पर निलंबित आईपीएस मणिलाल पाटीदार ने शनिवार को स्वयं को कानून के हवाले कर दिया। अब मामले में आगे की कार्रवाई होगी।
पाटीदार के हाजिर होने पर मृतक के परिजनों में ली राहत
मृतक क्रशर कारोबारी इंद्रकांत त्रिपाठी के बड़े भाई व मुकदमे की वादी रविकांत त्रिपाठी ने बताया कि मुख्य आरोपी आईपीएस मणिलाल पाटीदार ने भ्रष्टाचार निवारण कोर्ट आत्मसमर्पण किया है। 25 माह बाद उसके कानून के हवाले होने पर उन्हें राहत मिली है।
उनका कहना है कि पुलिस गिरफ्तारी करने में नाकाम रही। कई टीमें लगाई गईं, लेकिन पाटीदार को बचाने का पूरा प्रयास किया गया। उच्च न्यायालय के दबाव में आरोपी ने आत्मसमर्पण किया है। मुख्य आरोपी के फरार होने से परिवार को हमेशा किसी अप्रिय घटना का भय बना रहता था।
इस मामले में यह आरोपी पहले से जेल में हैं बंद
इंद्रकांत त्रिपाठी मौत के मामले में तत्कालीन थानाध्यक्ष कबरई देवेंद्र शुक्ला, सिपाही अरुण कुमार यादव, व्यापारी सुरेश सोनी व ब्रह्मदत्त पहले से जेल में निरुद्ध हैं। इन सभी पर आत्महत्या के लिए उकसाने और भ्रष्टाचार का मामला दर्ज है। डेढ़ वर्ष से जमानत याचिका पर लगातार सुनवाई बढ़ रही है। अब मुख्य आरोपी ने भी आत्मसमर्पण कर दिया है।