कानपुर। 1975 में गब्बर सिंह ने एक सवाल पूछा था कि ‘होली कब है, कब है होली’। वही सवाल अबकी 2016 में हर आम-ओ-खास एक-दूसरे से पूछ रहा है क्योंकि होली पर असमंजस है। कई पंचांगों में पूर्णिमा और भद्रा शुरू व खत्म होने के समय में अंतर है। विद्वानों का कहना है कि होली 23 मार्च को तड़के सूर्योदय से पहले ही जलाई जाएगी। तड़के 4 बजकर 24 मिनट से सूर्योदय के पहले तक ही शुभ मुहूर्त है। लेकिन कुछ पंडित 23 की शाम भी होली जलाने को ठीक बता रहे हैं। अब अगर 23 मार्च को तड़के होली जलेगी तो मूड के हिसाब से शहरी उसी दिन होली खेलने भी लगेंगे लेकिन परंपरा के हिसाब से तो 24 को रंग खेलना चाहिए। सबको यही सवाल परेशान कर रहा है कि रंग 23 को चलेगा या 24 को। पुलिस-प्रशासन भी परेशान है कि 23 को व्यवस्था करे या 24 को या दोनों दिन।
आचार्य चंद्रहास द्विवेदी कहते हैं कि ऐसा करीब 42 साल बाद हो रहा है जब होली जलाने और होली खेलने में पूरा एक दिन का अंझा माना गया है। इस दिन चंद्रग्रहण (कानपुर में नहीं दिखेगा) भी होगा। पंडित दीपक पांडेय और पंडित कुलदीप पांडेय ने बताया कि काशी धर्मसभा, काशी ऋषिकेश, विश्व पंचांग, गणेश आपा और प्रताप पंचांग में 22 मार्च को भद्रा और पूर्णिमा लगने के साथ इनके समाप्त होने का समय अलग-अलग दिया गया है। इससे होली जलाने के मुहूर्त में कुछ क्षणों का अंतर है। पर, सभी पंचांगों में होली 23 मार्च को सूर्योदय के पहले तक जला लेना ही शुभ बताया गया है।