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सुन्नी-शिया उलेमा ने कहा, रामजन्मभूमि-विवादित स्थल के मालिकाना हक पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला ही मान्य

Sat, 02 Nov 2019 11:11 AM IST
प्रभापुंज मिश्रा यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
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राम जन्मभूमि
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रामजन्मभूमि-विवादित स्थल के मालिकाना हक के सुप्रीम कोर्ट के आने वाले फैसले को लेकर शहर में भी उत्सुकता का माहौल है। सभी अपने अपने हिसाब से यह आकलन करने में जुटे हैं कि फैसला क्या आ सकता है। फिलहाल दो दिन पहले शिया आलिम मौलाना कल्बे सादिक ने फिर यह बात कही, कि उनकी निजी राय है कि मुसलमानों को बाबरी मस्जिद की जमीन फैसले के पहले हिंदुओं को दे देनी चाहिए।
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इस मामले में शहर के शिया और सुन्नी आलिमों ने अपनी राय जाहिर की है। सभी ने एक सुर में सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर ही भरोसा करने को कहा है। फैसला अगर मुसलमानों के पक्ष में आता है तो वह अल्लाहताला का शुक्र अदा करेंगे और विरोध में फैसला आया तो वह सब्र करेंगे।

जमीयत उलेमा-ए-हिंद के प्रदेश महामंत्री और देवबंदी विचारधारा के शहरकाजी मौलाना हाफिज अब्दुल कुद्दूस हादी ने कहा कि जो बात कल्बे सादिक ने कही है वह उनकी निजी राय हो सकती है। सभी तरह की कोशिशों के बाद सुप्रीम कोर्ट ही अंतिम रास्ता बचा है। शीर्ष अदालत जो भी फैसला करेगी, वह मान्य होगा। 

बरेलवी विचारधारा के शहरकाजी मौलाना आलम रजा नूरी ने कहा कि मस्जिद वक्फ की गई है, जिस जगह को वक्फ कर दिया जाता है, उस पर किसी का मालिकाना हक नहीं होता है। देखरेख के लिए सिर्फ मुतवल्ली तैनात हो सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट से बड़ा कोई न्याय का दरबार नहीं है, इसलिए पक्ष में फैसला आए या विपक्ष में अल्लाह के दरबार में शुक्र और सब्र करके कुबूल करेंगे।

 
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मौलाना कल्बे सादिक का बयान अप्रासंगिक है। शिया शहरकाजी मौलाना हामिद हुसैन ने कहा कि मस्जिद अल्लाह का घर है, उसे किसी को भी देने का कोई हक नहीं है। मौलाना कल्बे सादिक ने यह बयान दिया है और कहा है कि यह उनका निजी बयान है। इससे शिया और सुन्नी आलिम इत्तेफाक नहीं रखते हैं, यह हिंदुस्तान के उलेमा साबित कर चुके हैं। 

जूही सफेद कालोनी की शिया जामा मस्जिद के इमाम मौलाना अलमदार हुसैन ने कहा कि अब फैसले के पहले इस पर बहस करना मुनासिब नहीं है। सुनवाई पूरी हो चुकी है और सुप्रीम कोर्ट जो फैसला देगा, उसे माना जाएगा। देश भर के मुसलमान उसे मानेंगे। सभी को उसे मानना ही चाहिए।
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