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Kanpur News: सुंदरकांड, जन्मदिन की पार्टियां आगे खिसकीं

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केस एक: 16 मार्च को बर्रा चार निवासी सुमित दीक्षित के प्रतिष्ठान पर सुंदरकांड का पाठ और भोज का आयोजन किया जाना था। 400 लोगों के लिए खाने की व्यवस्था की गई थी। कैटरिंग का ऑर्डर दिया गया था। कैटरिंग कारोबारी ने गुरुवार को सुमित को फोन किया और सिलिंडरों की व्यवस्था न हो पाने के कारण बुकिंग कैंसिल करने की बात कही। 50 हजार से ज्यादा की बुकिंग हुई थी।
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केस दो: जूही कलां निवासी राजेश द्विवेदी की 25वीं शादी की सालगिरह 15 मार्च को मनाई जानी है। उन्होंने अपने घर पर ही 150 लोगों को खाने के लिए आमंत्रित किया था। उन्होंने भी कैटरिंग की व्यवस्था की थी। अब कैटरिंग वाले ने इसे आगे बढ़ाने या बुकिंग कैंसिल करने के लिए कहा है। उन्होंने सबको आमंत्रण भी भेज दिया था। अब सभी को आयोजन न होने और नई तिथि का संदेश भेज रहे हैं।



कॉमर्शियल सिलिंडरों पर रोक लगाए जाने से कैटरिंग उद्योग पर भी संकट, बुकिंग हो रहीं कैंसिल



माई सिटी रिपोर्टर

कानपुर। सरकार की ओर से कॉमर्शियल सिलिंडरों पर रोक लगाए जाने के बाद होटल, रेस्टोरेंट, मिठाई और गेस्ट हाउस संचालकों की समस्याएं बढ़ती जा रही हैं। इसके अलावा कैटरिंग उद्योग पर बड़ा संकट आ गया है। कॉमर्शियल सिलिंडरों की व्यवस्था न हो पाने से संचालक एक सप्ताह की बुकिंग को कैंसिल कर रहे हैं या आयोजनों को आगे कराने के लिए ग्राहकों से कह रहे हैं। सभी को उम्मीद है कि एक सप्ताह बाद हालात बेहतर हो जाएंगे और गैस संकट भी खत्म हो जाएगा।
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कानपुर होटल, गेस्ट हाउस, स्वीट्स एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन के महामंत्री राजकुमार भगतानी ने बताया कि कैटरिंग कारोबारी किसी भी प्रकार का स्टाक नहीं करते हैं। ऑर्डर और बुकिंग के आधार का कारोबार करते हैं। गैस संकट से कालाबाजारी भी शुरू हो गई है। 19 किलो का सिलिंडर पहले 1700 रुपये का था, अब ब्लैक में 2000-2500 हजार रुपये का मिल रहा है। शहर में छोला-भटूरा, पूड़ी-सब्जी, जलेबी, खस्ता, समोसा का असंगठित क्षेत्र का भी प्रतिदिन करोड़ों का व्यापार होता है। इन पर भी गैस संकट का असर देखने को मिल रहा है।

कैटरिंग कारोबारी दिनेश गुप्ता ने बताया कि 15 मार्च से खरमास लग रहा है। ऐसे में शादी समारोह तो नहीं होंगे। इससे अगले कुछ दिनों पर बहुत अधिक मांग नहीं होगी लेकिन 19 मार्च से नवरात्र शुरू हो रहे हैं। इस दौरान भंडारे आदि का आयोजन होता है। एक सप्ताह तक की बुकिंग फिलहाल कैंसिल की गई है। उत्तर प्रदेश नमकीन निर्माता संघ के अध्यक्ष निर्मल त्रिपाठी ने बताया कि नमकीन के 25 प्रतिशत कारखाना गैस से ही चलते हैं। गैस मिल नहीं रही है। कारखानों में बंदी की तलवार लटक रही है। डीजल भट्ठी और इलेक्टि्रक भट्ठी बनवाने के ऑर्डर दिए हैं। कोयला भट्ठी भी चलाई जा रही है।
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