कानपुर में घाटमपुर के एक गांव में फुफेरी बहनों की आत्महत्या के पीछे ठेकेदार रामरूप की भी बड़ी भूमिका है। दरअसल, किशोरियों के साथ दुष्कर्म कर वीडियो बनाए जाने की खबर भट्ठा मजूदरों के बीच जंगल में आग की तरह फैल चुकी थी। इसके बाद 16 वर्षीय किशोरी के चाचा ने विरोध किया। ठेकेदार के बेटे और भांजे से वीडियो डिलीट करने को कहा। मना करने पर दोनों पीड़ित परिवार ठेकेदार के पास पहुंचे।
ठेकेदार ने उल्टा उनसे ही गालीगलौज शुरू कर दी। धमकी द कि चार से छह लाख रुपये खर्च कर दूंगा। मेरा कुछ नहीं बिगाड़ पाओगे, लेकिन वीडियो वायरल कर दिया, तो तुम्हारी बेटियों की शादी नहीं हो पाएगी। कहीं मुंह दिखाने के काबिल नहीं रहेंगी। ठेकेदार की ये बातें सुनकर दोनों बहनें रोते हुए अपनी झोपड़ी में चली गईं। इसके बाद रात को दोनों ने आत्महत्या कर ली।
मजदूर भी मारने लगे थे ताने
मंगलवार को हुई घटना की खबर वहां रहने वाले सभी मजदूरों तक पहुंच चुकी थी। पीड़ित परिजनों ने बताया कि बाकी मजदूर भी बेटियों को ताने मारने लगे थे। इससे भी बेटियां आहत थीं। बता दें, यहां 19 परिवार रहते हैं और 250 मजदूर काम करते हैं।
दोनों घरों में नहीं जले चूल्हे, रोने की आती रहीं आवाज
आत्महत्या करने वाली दोनों किशोरियों की झोपड़ियों से गुरुवार महिलाओं के रोने की आवाजें ही आ रही थीं। 16 वर्षीय किशोरी के दरवाजे पर उसकी मां के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। पास बैठी अन्य मजदूर महिलाएं उसे ढांढस बंधा रही थीं। उसके दो बड़े बेटे व दो बेटियां थीं। एक उसे छोड़कर जा चुकी है। इसी तरह दूसरी किशोरी के घर उसकी मां और एक छोटी बहन रोती मिली। अब तीन बेटियां व एक बेटा बचा है। दोनों घरों में चूल्हे भी नहीं जले थे।
एक ही गांव और बिरादरी के हैं पीड़ित और ठेकेदार
बरौली स्थित भट्ठे में ईंट पाथने का काम करने वाले परिवार हमीरपुर जिले के एक ही गांव और बिरादरी के हैं। किशोरी के पिता गांव के ही ठेकेदार रामरूप को भइया कहते हैं। रामरूप के कहने पर ही सभी यहां दीपावली बाद काम करने आए थे। हालांकि रामरूप पहले भी दूसरे भट्ठे में काम करता रहा है। पीड़ितों ने बताया कि पारिवारिक होने के नाते हम लोग उस पर विश्वास करके आए थे।
दबंग प्रवृत्ति का है ठेकेदार, दबाव में कराता है काम
पीड़ित परिवार ने बताया कि ठेकेदार दबंग प्रवृत्ति का है। वह यहां रह रहे लोगों को दबाव में लेकर काम करता है। उन्हें 1000 ईंट पथाई का 750 रुपये मिलता है। इसमें भी वह भट्ठा मालिक से कमीशन लेता है। किसी मजदूर का यदि स्वास्थ्य खराब हो जाए तो भी जबरिया काम करता है। हर 15 दिन में भट्ठा मालिक द्वारा खुराकी के रूप में कुछ रुपये दिए जाते हैं।
पोस्टमार्टम हाउस में बेहोश हुए दोनों किशोरियों के पिता
घटनाक्रम बयां करते हुए दोनों किशोरियों के पिता पोस्टमार्टम हाउस में गश खाकर गिर गए। वहां मौजूद मीडियाकर्मियों ने उन्हें पानी पिलाया। वह रोते हुए आपबीती बता रहे थे। उनका कहना था कि उन्हें नहीं पता था कि एक माह पहले भट्ठे पर आए ठेकेदार का बेटा और भांजा उनकी बेटियों के मौत का कारण बन जाएगा।