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फंदे से लटका मिला बैंक मैनेजर का शव

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बैंक मैनेजर रूपराम मिश्रा की फाइल फोटो। - फोटो : AKBARPUR
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कानपुर देहात। अकबरपुर क्षेत्र के बड़ौदा उप्र ग्रामीण बैंक, शाखा लालपुर के मैनेजर रूपराम मिश्रा (59) का शव रविवार सुबह भुगनियापुर गांव में घर के आंगन में फंदे से लटका मिला। वह घर में अकेले रहते थे। पत्नी, बेटा व बेटी की 2013 में उत्तराखंड में आए जलप्रलय में मौत हो चुकी है। दिल्ली से बेटे के आने पर शव फंदे से उतारा गया। फांसी लगाने की वजह फिलहाल स्पष्ट नहीं हुई है। पुलिस छानबीन कर रही है।
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रूपराम मिश्रा जून माह में बैंक से सेवानिवृत्त होने वाले थे। बेटा नवनीत उर्फ शिव दिल्ली में निजी कंपनी में इंजीनियर है। बहू कंचन एअर होस्टेस है। कुछ समय पूर्व ही उसका असम में स्थानांतरण हो गया है। वह वहां बेटे कार्तिक व अनय के साथ रहती है। रविवार की सुबह गांव के मनीराम प्रजापति मैनेजर के घर पर पहुंचे तो आंगन में फंदे पर शव लटका देखकर चीख पड़े। मोहल्ले के लोग इकट्ठा हो गए। पुलिस ने दिल्ली में रह रहे बेटे को जानकारी दी।
बेटा दिल्ली से दोपहर में पहुंचा। पुलिस ने जरूरी जानकारी लेने के बाद शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा।
कोतवाल तुलसीराम पांडेय ने बताया कि आंगन में लगे लोहे के जाल के सहारे रस्सी के फंदे से मैनेजर का शव लटका मिला। पास में ही लकड़ी का स्टूल पड़ा था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट व छानबीन के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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बेटा-बेटी व पत्नी की मौत का सदमा झेल चुके थे रूपराम
कानपुर देहात। बैंक मैनेजर रूपराम मिश्रा की पत्नी करुणा, छोटे बेटे ओमजी व बेटी सलोनी की वर्ष 2013 में उत्तराखंड में केदारनाथ जल प्रलय में मौत हो चुकी है। तीन सदस्यों की मौत का सदमा झेलने वाले रूपराम हमेशा जिंदादिली की बातें करते थे। स्वभाव से सौम्य व मिलनसार थे। गांव में उनके हम उम्र साथी हर दिन सुबह उनके पास आकर बैठते थे। रूपराम चाय बनाकर साथियों को पिलाते थे। रविवार को अनहोनी के बारे में जिसने सुना सहज विश्वास न कर सका। लालपुर के उप्र बड़ौदा ग्रामीण बैंक के सहायक प्रबंधक वीपी श्रीवास्तव व अकबरपुर बैंक के प्रबंधक अक्षय द्विवेदी ने बताया कि रूपराम हमेशा हंस कर मिलते थे। (संवाद)
बहू से मिलकर 26 फरवरी को लौटे थे
कानपुर देहात। रूपराम अपनी बहू का असोम ट्रांसफर होने पर बेटे नवनीत व पौत्रों के साथ बहू से मिलने गए थे। वहां से वह 26 फरवरी को लौटे थे। बेटे ने पुलिस को बताया कि पिता से रोज शाम को बात होती थी। रविवार को सुबह अनहोनी की खबर मिली। (संवाद)
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