सदर तहसील स्थित रजिस्ट्री कार्यालय में चल रहे भ्रष्टाचार और धन उगाही के बड़े खेल का कानपुर विजिलेंस की टीम ने भंडाफोड़ कर दिया है। शुक्रवार दोपहर करीब ढाई बजे विजिलेंस टीम ने अचानक उप निबंधक कार्यालय में छापेमारी कर उप निबंधक के इशारे पर घूस ले रहे एक निजी कर्मचारी को 60 हजार रुपये की नकदी के साथ रंगे हाथों दबोच लिया। टीम ने घूसखोर सब-रजिस्ट्रार अश्विन कुमार वर्मा और उनके सहयोगी निजी कर्मी जितेंद्र कुमार कुशवाहा को हिरासत में ले लिया है। इस बड़ी कार्रवाई से पूरी तहसील परिसर में हड़कंप और अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
बैनामा करने के एवज में मांगी 60 हजार की घूस
विजिलेंस कानपुर के टीम प्रभारी और क्षेत्राधिकारी प्रदीप कुमार ने इस बड़े ऑपरेशन का खुलासा करते हुए बताया कि एक पीड़ित शिकायतकर्ता ने बीते 22 मई 2026 को कानपुर सतर्कता अधिष्ठान कार्यालय में एक लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में पीड़ित ने आरोप लगाया था कि सदर तहसील के मौजा कंदरौली बांगर की आराजी गाटा संख्या 440 और 443 में से 14.64 डिसमिल जमीन का बैनामा करने के एवज में सब-रजिस्ट्रार कार्यालय द्वारा 60 हजार रुपये की रिश्वत मांगी जा रही है। बिना सुविधा शुल्क दिए रजिस्ट्री करने से साफ मना किया जा रहा था।
जाल बिछाकर निजी कर्मचारी को रंगे हाथों दबोचा, अफसर भी नपे
शिकायत मिलने के बाद विजिलेंस के पुलिस अधीक्षक ने मामले की गोपनीय जांच कराई, जिसमें घूस मांगे जाने के आरोप शत-प्रतिशत सही पाए गए। इसके बाद शुक्रवार को एसपी के निर्देश पर एक विशेष टीम का गठन कर सदर तहसील भेजा गया। योजना के मुताबिक, जैसे ही शिकायतकर्ता ने उप निबंधक कार्यालय में तैनात उनके चहेते निजी कर्मचारी जितेंद्र कुमार कुशवाहा को केमिकल लगे 60 हजार रुपये थमाए, वैसे ही आसपास सादे कपड़ों में मुस्तैद विजिलेंस टीम ने उसे चारों तरफ से घेरकर दबोच लिया। तलाशी लेने पर जितेंद्र के पास से रिश्वत की पूरी रकम बरामद हो गई। पूछताछ में आरोपी कर्मचारी ने कुबूल किया कि उसने यह रकम सब-रजिस्ट्रार के कहने पर ही ली थी।
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हिरासत में लेकर कानपुर रवाना हुई टीम, मुकदमा दर्ज
इस सीधे बयान और रंगे हाथों बरामदगी के बाद विजिलेंस टीम ने सब-रजिस्ट्रार सदर अश्विन कुमार वर्मा और उनके दलाल की भूमिका निभा रहे निजी कर्मी जितेंद्र कुमार कुशवाहा को तुरंत हिरासत में ले लिया। टीम दोनों को पहले स्थानीय कोतवाली लेकर गई, जहां जरूरी कागजी कार्रवाई पूरी करने के बाद उन्हें कड़ी सुरक्षा के बीच कानपुर मुख्यालय ले जाया गया।