केस-2
मैनावती मार्ग स्थित एक और प्रतिष्ठित स्कूल में पीजी में बच्चे को पढ़ाने पर सालाना 1,94,000 रुपये खर्च करने होंगे। दाखिला लेने पर एडमिशन फीस 30000 रुपये, स्कूल फीस 8000 रुपये मासिक यानी 96000 रुपये सालाना देनी होगी। बस के लिए 40 हजार रुपये सालाना फीस लगेगी।किताबों और यूनिफार्म का सेट 20 हजार रुपये का है। यूनिफार्म में छात्रों को लोअर-टीशर्ट का एक सेट दिया जाता है। एक्टिविटी समेत अन्य मदों के साथ खर्च दो लाख से अधिक पहुंच जाता है।
कानपुर में नामचीन निजी स्कूलों में बच्चों को प्लेग्रुप में दाखिला दिलाने के लिए मध्य वर्ग के परिवार को लोन तक लेना पड़ सकता है। इन स्कूलों में पीजी की फीस आईआईटी में बीटेक की फीस के बराबर है। इतना ही नहीं जितना पैसा आप इन स्कूलों की कॉपी-किताबों, यूनिफार्म पर खर्च करेंगे, उतने में ही छात्र विवि से सर्टिफिकेट या प्रोफेशनल कोर्स कर लेता है।
शहर के एक नामचीन स्कूल से पीजी करने में ढाई लाख रुपये तक खर्च आता है। आईआईटी में सामान्य और ओबीसी कैटेगरी के छात्रों की बीटेक की छमाही फीस 1,18,000 रुपये है। यानी एक साल में 2,36,000 रुपये शुल्क देना होता है, जो पीजी की फीस से 14 हजार कम है। विवि में पेंटिंग, अप्लाइड आर्ट, फ्रेंज, जर्मन व अन्य विदेशी भाषाओं के सर्टिफिकेट कोर्स कर सकते हैं।
फीस में 20 से 25 फीसदी तक बढ़ोतरी
इनकी फीस 15 से 17 हजार के बीच है। इसके अलावा बीए ऑनर्स जैसे कोर्स भी विवि से 16 हजार रुपये में हो जाते हैं। ये शुल्क भी स्कूलों में वसूले जा रहे कॉपी-किताबों और यूनिफार्म के खर्च से कम हैं। स्कूल अभिभावकों की जेब में डाका डालने का कोई भी मौका नहीं छोड़ रहे हैं। पिछले सालों के मुकाबले इस साल फीस में 20 से 25 फीसदी तक बढ़ोतरी की गई है।
मुनाफा स्कूलों के हिस्से में जा रहा है
ट्यूशन फीस के अलावा एक्टिविटी, मैग्जीन समेत अन्य मदों के नाम पर भी फीस वसूली जा रही है। इसके अलावा कॉपी-किताबें भी उन्हीं बुक स्टॉलों से मिल रही हैं जिन्हें स्कूल चिह्नित करते हैं। कॉपी-किताबों के नाम पर मनमाने पैसे अभिभावकों से वसूले जा रहे हैं। मिलीभगत के चलते मुनाफा स्कूलों के हिस्से में जा रहा है। स्कूल को हर साल किताबों के चैप्टर इधर से उधर कर अभिभावकों को इसलिए मजबूर कर देते हैं, ताकि वे किसी से पुरानी किताबें लेकर अपने बच्चों को न पढ़ा पाएं।
बच्चे की यूनिफार्म दूसरी दुकान से मिली तो पैंट और शर्ट का सेट 650 रुपये का था लेकिन जब वही सेट स्कूल की बताई दुकान से लिया तो 900 रुपये का पड़ा। पुरानी यूनिफार्म से लोगो निकाल कर लगाया तो भी स्कूल को आपत्ति थी, काफी बहस करने के बाद छात्र को प्रवेश दिया। -अशोक नगर स्थित स्कूल के एक अभिभावक
बच्चा नामचीन अंग्रेजी माध्यम में पढ़ता है। स्कूल में ही आउटलेट खुला है। बच्चे की किताबें और यूनिफार्म कहीं और से नहीं मिलती हैं। 20 हजार रुपये में किताब और यूनिफार्म दी गई है। पीजी के बच्चे का लोअर-टीशर्ट अगर ब्रांडेड भी लेंगे तो इतना महंगा नहीं होगा। एक साल में यूनिफार्म छोटी हो जाती है। हर साल इतना पैसा देना पड़ेगा। -आजादनगर स्थित स्कूल के एक अभिभावक