तालाब में नहीं लगा है खतरे का निशान
इसके बाद भी किसी का ध्यान तालाब में अक्सर नहाने आने वाले बच्चों पर नहीं गया। डूबे हुए छात्रों को बाहर निकालने वाले लोगों ने बताया कि तालाब की गहराई बीच-बीच में करीब छह से सात फीट तक थी। इसके बाद भी तालाब के पास कहीं भी किसी खतरे का बोर्ड नहीं लगाया गया।
अक्सर बच्चे नहाते आते हैं
इसके अलावा, न ही बच्चों को रोकने के लिए किसी गार्ड को तैनात किया गया। आसपास के रहने वाले लोगों ने बताया कि तालाब में अक्सर बच्चे नहाते हुए नजर आ जाते थे। ये बच्चे डायट की तरफ से सरोवर की बाउंड्रीवाल फांदकर अंदर आ जाते थे।
एसडीएम बोले- छिपकर आते हैं बच्चे
डायट परिसर के पानी को तालाब तक बनाए गए नाले से भी कुछ बच्चे अंदर घुस आते थे। एसडीएम गुलाब चंद्र अग्रहरि का दावा है कि पूर्व में कई बार तहसील में तैनात होमगार्ड व कर्मचारी बच्चों को भगा चुके थे, लेकिन वो चोरी छिपे तालाब में नहाने पहुंच जाते थे।
हादसे के बाद जागा है प्रशासन
तालाब के चारों तरफ जालीदार तार से बाउंड्री बनाई गई थी, लेकिन मेन गेट पर कभी ताला बंद नहीं रहता था। शनिवार को इस बड़े हादसे के बाद प्रशासन की नींद खुली, तो एसडीएम ने तत्काल प्रभाव से मेन गेट पर ताला लगाने, डायट के नाले वाले रास्ते को बंद करने के निर्देश जारी कर दिए।
नजफगढ़ गंगा घाट पर होगा अंतिम संस्कार
पोस्टमार्टम के बाद दो एम्बुलेंस से चारों बच्चों के शवों को गांव लाया गया। परिजनों की चीख पुकार से नर्वल का सेमरझाल गांव दहल गया। विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना भी गांव पहुंच रहे हैं। जानकारी के अनुसार, महाराजपुर के नजफगढ़ गंगा घाट पर अंतिम संस्कार होगा।