फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

इस शहर में बढ़ा आवारा 'कुत्तों का खौफ', एक और बच्चा हुआ शिकार

Fri, 08 Jun 2018 05:24 PM IST
टीम डिजीटल,कानपुर उत्तर प्रदेश
विज्ञापन
1 of 6
कानपुर में बढ़ा कुत्तों का आतंक
यूपी के कानपुर में आवारा कुत्तों का आतंक इस कदर बढ़ा है कि हर कोई डर-डर कर घर से बाहर निकलता। लोगों को लगता है कि वे भी कहीं इनका शिकार न हो जाएं। पिछले चार दिनों शहर में कई ऐसी घटनाएं हुई हैं जिससे लोगों में आवारा कुत्तों के हमले का खौफ बढ़ गया।  गुरुवार को शहर के जाजमऊ में केडीए ग्रीनहाउस बिल्डिंग के पास हुई घटना में नमाज पढ़कर लौट रहे आठ साल के बच्चे को आवारा कुत्ते ने काटकर लहूलुहान कर दिया। आस-पास के लोगों ने कुत्ते को ईंट-पत्थर मारकर भगाया। परिजनों ने हंगामा किया। पुलिस ने उन्हें शांत कराया। बच्चे को नर्सिंग होम में भर्ती कराया गया। पांच जून को तातियागंज चौबेपुर में भी कुत्तों ने एक बच्चे को काटकर लहुलुहान कर दिया था। वह अस्पताल में गंभीर हाल में भर्ती है।

दो दिन पहले भूखे आवारा कुत्तों ने मासूम को नोच डाला था 
कानपुर के चौबेपुर में मंगलवार सुबह विशंभर सिंह प्रताप सिंह महाविद्यालय के कैंपस में खेल रहे आठ साल के मासूम पर कुत्तों के झुंड ने हमला कर दिया। बच्चे की चीख सुन मजदूरों ने कुत्तों को भगाकर बच्चे को निजी अस्पताल पहुंचाया, जहां से उसे हैलट रिफर कर दिया गया। हैलट इमरजेंसी में भर्ती बच्चे की हालत बेहद गंभीर है। 
विज्ञापन

2 of 6
कुत्तों के हमले से घायल बच्चा
जाजमऊ के मोतीनगर निवासी प्राइवेट कर्मी शकील का बेटा नौशाद (8) गुरुवार देर शाम नमाज पढ़कर मक्का मस्जिद से घर लौट रहा था। केडीए ग्रीनहाउस बिल्डिंग के पास एक आवारा कुत्ते ने नौशाद को पीछे से आकर दबोच लिया और उसके हाथ-पैर समेत चेहरे पर बुरी तरह काट लिया। नौशाद की चीख सुनकर आस-पास के लोगों ने पत्थर मारकर कुत्ते को भगाया। परिजन मौके पर पहुंचे और हंगामा करने लगे। परिजनों का कहना था कि क्षेत्र में सैकड़ों आवारा कुत्ते घूमते हैं लेकिन उन्हें कैटल कैचिंग दस्ता नहीं पकड़ता। कुत्ते आए दिन किसी न किसी को अपना शिकार बना रहे हैं। हंगामे की सूचना पर पहुंची पुलिस ने लोगों को शांत कराया।

कानपुर सहित आस-पास के सभी इलाकों आवारा कुत्तों की आबादी बढती जा रही है । कुत्ते बड़े-बड़े झुंड बनाकर सड़कों पर आवारा घूमते रहे तो वे लोगों पर उसी तरह झुंड में हमला करने लगे हैं। सीतापुर, कानपुर समेत कई स्थानों पर कुत्तों के इंसानों पर हमला करके उन्हें खा लेने की घटना सामने आ रही है। पर देश के इकलौते देहरादून स्थित भारतीय वन्य जीव संस्थान ने अध्ययन किया है।
विज्ञापन

3 of 6
सड़क पर घूम रहे आवारा कुत्ते
जानवरों को अधिक दूर जंगलों में जाकर न छोड़ें। इससे कुत्ते कम समय में और अधिक आक्रामक हो जाएंगे। विज्ञानियों का कहना है कि सबसे पहले आवारा कुत्तों की आबादी रोकने के लिए प्रयास किए जाएं। नसबंदी करके उन्हें पालतू जानवर की तरह रखा जाए। अगर उन्हें सड़कों पर छोड़ा गया और उनका झुंड बड़ा होता गया तो कुत्तों की मानसिकता में बदलाव आने लगेगा। 
विज्ञानियों ने उठाए ये कदम....

4 of 6
डेमाे पिक
कुत्तों के हमलावर होने की घटनाओं पर संस्थान के विज्ञानियों ने घटनास्थल पर जाकर कुत्तों का ब्लड सैंपल लिया। यह आशंका व्यक्त की जा रही थी कि कहीं भेड़ियों के साथ मेटिंग करके कुत्तों की नई प्रजाति तो पैदा नहीं हो गई जो इतने आक्रामक हैं। संस्थान के विशेषज्ञ डॉ. वाईवी झाला ने बताया कि डीएनए जांच में वे कुत्ते ही निकले हैं। इनमें भेड़ियों का जीन नहीं पाया गया। विज्ञानियों की यह भी आशंका है कि पालतू कुत्ते बहुत दिनों तक आवारा कुत्तों के संपर्क में आए तो उनमें फेरल की मानसिकता पैदा हो सकती है।
 
विज्ञापन

5 of 6
डेमाे पिक
नगर निगम की लापरवाही से बढ़े आवारा कुत्ते
नगर निगम की लापरवाही से शहर में आवारा कुत्ते बढ़ते जा रहे हैं। ऐसे कुत्तों के बंध्याकरण (नसबंदी) की योजना भी ठंडे बस्ते में पड़ी है।  कुत्तों के काटने की वजह से एंटी रैबीज इंजेक्शन लगवाने वालों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। इस कंपनी ने 367 रुपये की दर से कुत्तों का बंध्याकरण शुरू किया, पर यह संस्था साल भर में मात्र 362 कुत्तों का ही बंध्याकरण कर पाई। तभी से यह योजना ठंडे बस्ते में पड़ी है, जबकि आवारा कुत्ते लगातार बढ़ते जा रहे हैं। शहर में 50 हजार से ज्यादा आवारा कुत्ते हैं।
 
विज्ञापन
विज्ञापन

6 of 6
डेमाे पिक
नगर निगम ने तीन साल पहले आवारा कुत्तों के बंध्याकरण के लिए अभियान चलाया था। इसके लिए फूलबाग स्थित कांजी हाउस में विशेष अस्पताल बनाया गया था। उसमें आपरेशन थियेटर, प्री आपरेटिव वार्ड, पोस्ट आपरेटिव वार्ड और आवारा कुत्तों को रखने के लिए कैनल बनवाए थे। एक निजी संस्था को एक साल तक बंध्याकरण करने का ठेका दिया था। इस कंपनी ने 367 रुपये की दर से कुत्तों का बंध्याकरण शुरू किया, पर यह संस्था साल भर में मात्र 362 कुत्तों का ही बंध्याकरण कर पाई। तभी से यह योजना ठंडे बस्ते में पड़ी है, जबकि आवारा कुत्ते लगातार बढ़ते जा रहे हैं। शहर में 50 हजार से ज्यादा आवारा कुत्ते हैं। नगर निगम के पशु चिकित्साधिकारी डा. एके सिंह ने बताया कि आवारा कुत्तों के बंध्याकरण के लिए तीन बार टेंडर आमंत्रित किए जा चुके हैं, पर पर्याप्त टेंडर नहीं आए। नए सिरे से टेंडर कराने की तैयारी की जा रही है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें