मां तेरी ममता का न ओर न छोर, कैसे तू अपने आंचल के टुकड़े को झाड़ियों में गई छोड़....मन में कुछ ऐसे ही प्रश्नों को लेकर हरदोई के रामजानकी मंदिर में मंगलवार शाम मिली बच्ची की मां के बारे में लोग कयास लगा ही रहे थे कि बुधवार को डीएम से लेकर एसपी कार्यालय तक एक मां अपने कलेजे के टुकड़े को खोजती दिखी। जिस अधिकारी से भी मिली वह हाथ जोड़कर यही विनती करते दिखी कि मेरे बेटे से मुझे मिलवा दो....। बहरहाल एक माता को कुमाता तो दूसरी मां को बेटे की खातिर बिलखते देख सभी के मुंह से एक ही बात निकली की कुछ तो कारण रहे होंगे ऐसे ही माता कुमाता नहीं बन जाती....
कोई तो समझो, एक साल से नाई मिलो मोरो बच्चा..
हरदोई के सांडी के ग्राम उल्लामऊ ककड़ी गांव निवासी सुनीता एक माह बाद एक बार फिर हाथों में अपने बेटे की फोटो लिए अधिकारियों की चौखट पर दर दर भटकते नजर आई। पहले उसने सिटी मजिस्ट्रेट के यहां जाकर अपना दुखड़ा सुनाया फिर पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचकर अपने बेटे को खोजने की फरियाद की।
एसपी कार्यालय के बाहर पहुंची सुनीता पत्नी रामनरेश ने बताया कि उसका 25 वर्षीय बेटा अजयपाल एक साल पहले टड़ियावां स्थित अपने मामा के यहां गया था लेकिन न तो अपने मामा के यहां पहुंचा और न ही घर। तब से लेकर आज तक वह अपने बेटे को खोजती घूम रही है लेकिन आज तक उसकी कोई खोज खबर नहीं मिल सकी। उसने बताया कि वह जहां जा सकती थी वहां गई लेकिन कोई खोज खबर नहीं लगी। अगर किसी को उसके बेटे की खबर लग जाए तो वह 979236578 पर सूचना जरूर दे दे।
मां के आंचल से दूर गैरों की गोद में नन्ही परी लखनऊ रवाना
हैरान करने वाली बात है कि जहां एक नन्ही परी सिर्फ एक रात रूकी वहां के कर्मचारी और चिकित्सक बुधवार को उसको विदा करते समय अपने आंसू न रोक सके उस मां पर क्या गुजरी होगी कि जिस मां ने नौ माह अपनी कोख में बच्ची को रख झाड़ियों में उसे फेंक दिया। बहरहाल नन्ही परी को बाल गृह शिशु लखनऊ की टीम को भेज दिया गया। नन्ही बच्ची की रात भर सेवा जिले के चाइल्ड लाइन के पदाधिकारियों ने की। हरदोई के श्री राम जानकी मंदिर में मिली बच्ची को चाइल्ड लाइन के पदाधिकारी पहले महिला चिकित्सालय ले आए और उसको वहां पर रखकर रात भर चिकित्सकों के साथ सेवा की। केंद्र समन्वयक प्रतिमा सक्सेना ने बताया कि बाल कल्याण समिति के सामने प्रस्तुत करने के बाद उनकी अनुमति मिली तो फिर बाल गृह शिशु प्राग नारायण रोड लखनऊ उसे भेज दिया गया। समिति अध्यक्ष शिशिर गौतम व गिरीश द्विवेदी रात में ही बच्ची का हाल लेने चिकित्सालय पहुंचे थे। उन्होंने बताया कि बच्ची को लखनऊ से आई टीम के साथ भेज दिया गया। इस दौरान जब वह यहां से गई तो रात में उसको देखने वाली चिकित्सकों व स्वास्थ्यकर्मियों तक की आंखों में आंसू आ गए। अक्षय प्रताप, सरिता अग्रवाल आदि मौजूद रहे।