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'सेना के लिए काम और समाज के लिए दान', कुछ ऐसी है निःसंतान उद्योपति एमसी त्रिपाठी की कहानी

Thu, 18 Jan 2018 03:24 PM IST
गौरव शुक्ला, अमर उजाला, कानपुर
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उद्योगपति महेशचंद्र त्रिपाठी की कहानी
आपको जानकर हैरानी होगी कि सेना के पैराशूट, हैलीकॉप्टर और एम्युनिशन बॉक्स के हैंडल और मजबूत रस्सियां समेत तमाम तरह के मजबूत प्रोडक्ट कानपुर में बनते हैं। शहर का सूती धागा और कपड़ा आयुध कारखानों में हथियारों की सुरक्षा के काम में भी आता है। कानपुर की एशिया टेक्सटाइल कोलकाता, पुणे, मुंबई, जबलपुर, नीलगिरी, खमरिया और भूसावल की ऑर्डनेंस फैक्ट्रियों को कई वर्षों से अपने प्रोडक्ट सप्लाई करती आ रही है। इस टेक्सटाइल कंपनी को चलाने वाले महेश चंद्र त्रिपाठी का पूरा जीवन 'सेना के लिए काम और समाज के लिए दान' को समर्पित हैं।
जानिए महेश चंद्र के बारे में कुछ खास बातें....
 

 
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1972 में एशिया टेक्सटाइल के नाम से कंपनी शुरू कर दी

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उद्योगपति महेशचंद्र त्रिपाठी की कहानी
साल 1965 में इंटरमीडिएट की पढ़ाई पूरी करने के बाद कानपुर के महेश चंद्र त्रिपाठी ने इंटरनेशनल प्रोडक्ट्स कंपनी में बतौर सप्लाई अधिकारी अपनी पहली और आखिरी नौकरी की शुरुआत की। डिफेंस के लिए आइटम बनाने वाली कंपनी के साथ काम करते हुए महेश ने कई अनुभव प्राप्त किए और ठीक 7 साल बाद 1972 में एशिया टेक्सटाइल के नाम से चमनगंज में खुद की कंपनी शुरू कर दी। कानपुर की एशिया टेक्सटाइल कंपनी तमाम आयुध निर्माणी संस्थानों को बमों की पैकिंग वाले टेप मीडियम प्रूफ, गोला बारूद लोड करने वाले वेविन कॉटन बैंड, एम्युनिशन बॉक्स के हैंडल जैसे प्रोडक्ट सप्लाई कर रही है। महेश चंद्र त्रिपाठी के परिवार में पत्नी सरला त्रिपाठी और वह खुद हैं। निःसांतान दंपति ने समाज सेवा को अपना धर्म बना लिया। कई गरीब बेटियों की शादियां कराईं, मंदिरों का निर्माण कराया और गौशाला व वृद्धाश्रम खोले। 
 
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डिफेंस के लिए महेश बनाते हैं ये आइटम

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उद्योगपति महेशचंद्र त्रिपाठी की कहानी
- टेप कॉटन फाइन सुप्रीफाइन
- टेप कॉटन फॉर पैराशूट
- टेप कॉटन फॉर इंसुलेशन
- टेप कॉटन मीडियम फॉर एम्युनिशन परपस
- बमों की सुरक्षा के लिए बैग किट
- हेलीकॉप्टन के लिए रस्सी की सीढ़ियां 
- सेना के लिए पतली, कभी न टूटने वाली रस्सियां
 

समाजसेवा के क्षेत्र में महेश के कुछ कार्य

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उद्योगपति महेशचंद्र त्रिपाठी की कहानी
महेश चंद्र त्रिपाठी कानपुर शहर के मशहूर उद्योगपतियों की श्रेणी में आते हैं। उनकी कमाई का अधिकतर हिस्सा समाज और पशु-पक्षियों की सेवा के काम आता है। महेश के अनुसार 1972 में पैदा होते ही बेटी की मौत हो जाने के बाद उन्होंने और उनकी पत्नी सरला त्रिपाठी ने अपना जीवन दूसरों की सेवा के लिए समर्पित कर दिया। 
- पक्षियों के लिए हर रोज 10 किलो बेसन की गोलियां बनवाते हैं
- मां अन्नपूर्णा के नाम से गौशाला
- बिठूर में वृद्धाश्रम
- जमीन बेचकर गरीब बेटियों की शादी
- निर्धनों को अपने घर में पनाह
- बीमार जानवरों के इलाज के लिए लगाए प्राइवेट डॉक्टर
 
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प्रोफाइलः-

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उद्योगपति महेशचंद्र त्रिपाठी की कहानी
नामः महेश चंद्र त्रिपाठी
जन्मः 27 जुलाई 1944 ग्राम बड़ौरा, जिला उन्नाव
पिताः स्वर्गीय शिवनाथ त्रिपाठी
मांः स्वर्गीय कांलिंद्री देवी
शिक्षाः इंटरमीडिएट
उपलब्धिः देश के रक्षा संस्थानों के लिए विशेष आइटम बनाने वाली एशिया टेक्ससाइल कंपनी के संचालक, समाजसेवी
 
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इन जगहों पर प्रोडक्ट्स की सप्लाई देते हैं महेश

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पत्नी के साथ महेश चंद्र त्रिपाठी की पुरानी फोटो
गोला बारूद फैक्ट्री खड़की पुणे, फील्ड गन फैक्ट्री कानपुर, गन कैरिज फैक्ट्री जबलपुर, गन एंड शेल फैक्ट्री कोलकाता, आयुध कपड़ों की फैक्ट्री चेन्नई, आयुध निर्माणी फैक्ट्री शाहजहांपुर, ऑर्डनेंस फैक्ट्री कानपुर,  आयुध निर्माणी अम्बरनाथ मुंबई, आयुध निर्माणी अम्बाझारी नागपुर, आयुध निर्माणी भुसावल, आयुध निर्माणी इटारसी, आयुध निर्माणी खामरिया जबलपुर, आयुध निर्माणी तिरुचिरापल्ली, ऑर्डनेंस पैराशूट फैक्ट्री, कानपुर
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