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बहुत रईस निकला गेहूं पीस बमुश्किल गुजारा करने वाला रहीश, जेवरों की पोटली भी ईमान न डिगा सकी

Sun, 17 May 2020 11:00 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इटावा
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जेवरातों से भरी पोटली असल मालिक को सौंपते रहीश - फोटो : amar ujala
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इटावा के महेवा में चक्की पर अनाज पीसकर गुजर-बसर करने वाला रहीश खां उस वक्त हैरान रह गए, जब पिसाई के लिए आए गेहूं के एक बोरे में से एक पर्स में रखे सोने के जेवर निकले। बकेवर कस्बे के रहने वाले रहीश का मन एक बार ईमानदारी और बेईमानी के बीच फंस गया।
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काफी देर तक सोच विचार करने के बाद उन्होंने ऐसा फैसला लिया कि वह इंसानियत के लिए मिसाल बन गया। रहीश ने पूरे सोने के आभूषण उसके मालिक को लौटा दिए। जेवरातों की कीमत करीब एक लाख रुपए है। ईमानदारी की यह मिसाल लखना कस्बे के छोटा हाता मोहाल की है।

 
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जहां राधेलाल शर्मा की आटा चक्की है और उस पर गेहूं पीसने का काम बकेवर के रहीश करते है। रविवार को गेहूं पिसाने के लिए कस्बे के भिटारी मोहाल में ही रहने वाले प्रेमचंद उर्फ कल्लू कुशवाहा पुत्र जनक सिंह पहुंचे और गेहूं का बोरा चक्की पर पिसने के लिए रखकर चले गये। रहीश ने कुछ देर बाद बोरा खोलकर पिसाई के लिए गेहूं निकाले तो उसमे एक लेडीज पर्स मे रखे सोने के आभूषण निकले।

उन्होंने ईमानदारी दिखाते हुए प्रेमचंद उर्फ कल्लू को बुलाकर ये सब लौटा दिया। रहीश ने बताया कि एक बार तो सोने के आभूषण देखकर मन बहक गया था, लेकिन उसने तय किया कि वह इन्हें इसके असल मालिक तक पहुंचाएगा।

वहीं प्रेमचंद उर्फ कल्लू कुशवाहा ने कहा कि उसकी पत्नी ममता ने अपने आभूषण एक पर्स मे रखकर गेंहू के बोरे मे रख दिये थे। उसे ध्यान ही नहीं रहा कि उसने बोरी में आभूषण रखे हुए थे। ये सुरक्षित रखने के लिए गेहूं में रखे थे। रहीश की ईमानदारी के चलते ही ये वापस मिल पाए हैं। उन्होंने रहीश का इनाम व दुआ दी।
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