यह बात सौ आने सच है कि धरती पर ईमानदारी कभी खत्म नहीं हो सकती। आज भी यहां कई ऐसे लोग हैं जो वाकई पूरी तरह से ईमानदारी का जीवन जीते हैं। यूपी के कानपुर शहर में हुई एक घटना उन सभी बेईमानों के लिए एक सबक है जो दूसरों का पैसा मारने की फिराक में अपना रात-दिन बर्रबाद कर रहे हैं।
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ईमानदार चायवाले की कहानी
कानपुर के नयागंज लाल फाटक पर रमेश कुमार की चाय की दुकान है। सोमवार की दोपहर बर्रा निवासी व्यापारी अभिषेक वहां चाय पीने आए थे। अचानक अभिषेक की तबियत बिगड़ गई और वह वहीं गिर पड़े। इसी दौरान उनके थैले में रखी 500 रुपए के नोटों की गड्डी वहीं पर गिर पड़ी। थोड़ी देर बाद जब अभिषेक को होश आया तो वह अपने पचास हजार रुपयों से भरे थैले के बारे में सभी से पूछ रहे थे।
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ईमानदार चायवाले की कहानी
रमेश ने जब नोटों से भरा थैला अभिषेक को थमाया तो उनकी जान पर जान आ गई। अभिषषेक ने उन्हें पुरस्कार के तौर पर एक हजार रुपए दे दिए। इसके बाद से रमेश की ईमानदारी के चर्चे पूरे शहर में हो रहे हैं। व्यापारियों ने रमेश को उनकी ईमानदारी के लिए सम्मानित भी किया है।
रमेश ने बताया कि वह रोजाना ढाई सौ रुपए कमा लेते हैं इन्हीं पैसों से उनके घर का खर्च चलता है। उनके 3 बेटी और 2 बेटे हैं। बेटियों की शादी हो चुकी है।दो बेटे अभी छोटे हैं और पढ़ रहे हैं। रमेश का मानना है कि ईमानदारी से जीवन जीने के कई फायदे हैं। लेकिन लोग इसे समझ नहीं पाते।