फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

पिता पुजारी बनकर पुण्य कमाता रहा और बेटा बन गया बागी  

Wed, 10 May 2017 12:03 AM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
विज्ञापन
भगवतपुर गांव में अपनी पौशाला के पास खड़ा दस्यु राजू सिंह का पिता संतोष सिंह
विज्ञापन
पिता गांव के मंदिर में पुजारी बनकर पुण्य कमाता रहा और बेटा बागी हो गया। मंगलवार को दस्यु बेटे के मार दिए जाने के बाद भी राजू सिंह का पिता संतोष सिंह रोजमर्रा की तरह बांदा के बदौसा गांव में  बने भैरमबाबा मंदिर में खुद के द्वारा स्थापित प्याऊ से लोगों को पानी पिलाता रहा। हालांकि उसे बेटे के मारे जाने का अफसोस था। कहा कि अगर पुलिस शव लेने के लिए बुलाएगी तो जाएगा वरना नहीं। पिता ने यह भी कहा कि ‘जस करम करत रहा वहै भोगिस, वही मरहिन का रहा है’। 
विज्ञापन


‘बुढ़ाती द बाप बेचारा अकेले रही, हमैं या दुख है
इनामी दस्यु राजू सिंह का पिता संतोष सिंह मूलरूप से चित्रकूट जनपद के सगवारा गांव का रहने वाला है। पत्नी के कहीं चले जाने पर वह अपनी मां के मायके (ननिहाल) भगवतपुर (चित्रकूट) में आकर बस गया। तब से यहीं रहा रहा है। राजू भी उसी के साथ रहता था। संतोष का बुढ़ापा है। उसने साधू जीवन अपना लिया है। साधूवेश में रहकर घर के बगल में बने मंदिर में पूजा-पाठ करता है और वहां से गुजरने वाले राहगीरों के लिए पेयजल का प्याऊ खोल रखा है। सुबह खुद पानी भरता है और दिन भर लोगों को पिलाता है। रात को उसी के गांव में बेटे को मार दिए जाने और शव पुलिस के कब्जे में होने के बाद भी संतोष की दिनचर्या पर कोई असर नहीं पड़ा। उसका कहना था कि ‘बुढ़ाती द बाप बेचारा अकेले रही, हमैं या दुख है’। 

अपने गांव को भी नहीं बख्श्ता था
डाकू राजू अपने ही गांव को भी वह नहीं बख्शता था। भगवतपुर के अलावा आसपास के गांव के लोग भी राजू सिंह से काफी खौफ खाते थे। उसका विरोध या मुखबिरी करने की हिम्मत नहीं जुटा पाते थे। पड़ोसी गांव कोल्हुवां, बघेलाबारी, खेरिया, डड़वामानपुर, संग्रामपुर, जबरापुर, पियार, कल्यानपुर सहित पड़ोसी मध्य प्रदेश के कई गांवों में भी राजू का आंतक था। खेरिया गांव के प्रधान पंकजेंद्र तिवारी बताते हैं कि सड़क निर्माण में राजू ने उनसे चौथ मांगी थी। उन्होंने फतेहगंज पुलिस को सूचना भी दी थी। और भी कई प्रधानों से चौथ मांगी। लेकिन ज्यादातर ने डर की वजह से पुलिस में तहरीर नहीं दी। बघेलाबारी के रामसुचित पटेल बताते हैं कि दस्यु राजू बहू-बेटियों को राह चलते छेड़ता था। क्षेत्र के अध्यापकों में भी दहशत थी। 
विज्ञापन
विज्ञापन


                     
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें