एसटीएफ के विदेशी मुद्रा लूटने के मामले की परतें एक के बाद एक खुल रही हैं। एसटीएफ कानपुर यूनिट ने लूट की घटना पर पर्दा डालने और खुद को बचाने के लिए सलाउद्दीन के कस्टडी से फरार होने की झूठी कहानी गढ़ी थी। एसएसपी लखनऊ की जांच रिपोर्ट में इसका भी खुलासा हुआ है।
तीन मार्च को एसटीएफ कानपुर यूनिट के तत्कालीन सीओ विजय प्रताप यादव, इंस्पेक्टर जैनुद्दीन व सिपाही राकेश ने अमौसी एयरपोर्ट पर कानपुर के दलेलपुरवा निवासी सलाउद्दीन, प्रतापगढ़ के कुंडा निवासी उसके साले शहनवाज व दिल्ली के हैदर व मो. लुकमान को पकड़ा था। इसके बाद एसटीएफ ने दावा किया था कि जब वह चार मार्च को सलाउद्दीन के दोस्त दलेलपुरवा निवासी शावेज को पकड़ने आए थे तो भीड़ सलाउद्दीन को छुड़वा ले गई थी।