फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

यूपीः खुली एसटीएफ के झूठ की पोल, गढ़ी थी सलाउद्दीन के भागने की झूठी कहानी

Mon, 08 Apr 2019 08:49 PM IST
प्रशांत कुमार यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
विज्ञापन
डेमो पिक
विज्ञापन
एसटीएफ के विदेशी मुद्रा लूटने के मामले की परतें एक के बाद एक खुल रही हैं। एसटीएफ कानपुर यूनिट ने लूट की घटना पर पर्दा डालने और खुद को बचाने के लिए सलाउद्दीन के कस्टडी से फरार होने की झूठी कहानी गढ़ी थी। एसएसपी लखनऊ की जांच रिपोर्ट में इसका भी खुलासा हुआ है।
विज्ञापन


तीन मार्च को एसटीएफ कानपुर यूनिट के तत्कालीन सीओ विजय प्रताप यादव, इंस्पेक्टर जैनुद्दीन व सिपाही राकेश ने अमौसी एयरपोर्ट पर कानपुर के दलेलपुरवा निवासी सलाउद्दीन, प्रतापगढ़ के कुंडा निवासी उसके साले शहनवाज व दिल्ली के हैदर व मो. लुकमान को पकड़ा था। इसके बाद एसटीएफ ने दावा किया था कि जब वह चार मार्च को सलाउद्दीन के दोस्त दलेलपुरवा निवासी शावेज को पकड़ने आए थे तो भीड़ सलाउद्दीन को छुड़वा ले गई थी। 
विज्ञापन

आरोप था कि एसटीएफ ने उसके साथ लूट की है

एसएसपी लखनऊ की जांच में एसटीएफ के सभी तथ्य झूठे पाए गए। जांच रिपोर्ट के मुताबिक एसटीएफ चारों को पकड़कर बंथरा थाने ले गई थी। 34 लाख रुपये की विदेशी मुद्रा लूटकर सभी को छोड़ दिया था। इसके कुछ घंटे बाद हैदर का वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें उसने आरोप लगाया था कि एसटीएफ ने उसके साथ लूट की है।

इस पर सीओ सहित अन्य पुलिस कर्मियों ने सलाउद्दीन के कस्टडी से भागने की कहानी रची। इसके बाद विदेशी मुद्रा की बरामदगी दिखाकर अनवरगंज थाने में जमा कर दी थी। यह भी पता चला है कि कानपुर एसटीएफ यूनिट ने घटना संबंध में आलाधिकारियों को भी झूठी जानकारी दी थी। गुडवर्क का प्रेस नोट भी जारी किया था। 

घटना के कुछ दिन बाद सीओ विजय प्रताप यादव, इंस्पेक्टर जैनुद्दीन व सिपाही राकेश का गुपचुप तरीके से तबादला कर दिया गया था। विभाग ने इस संबंध में कोई जानकारी नहीं दी थी। रविवार को जब तीनों के खिलाफ लखनऊ में रिपोर्ट दर्ज हुई तो फिर से कार्रवाई के नाम पर तीनों के तबादले करने की बात कही गई। ऐसे में सवाल है कि क्या आलाधिकारी पहले से ही इन आरोपियों की करतूत से वाकिफ थे और जानबूझकर इस पर पर्दा डाल रहे थे। 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें