उन्होंने 15 साल से अधिक समय तक सिगरेट पी है। सांस में तकलीफ बढ़ने के बाद सिगरेट छोड़ी। उसके बाद से वे इन्हेलर से दवाएं ले रहे थे। रोगी ने डॉक्टरों को बताया कि बाद में इन्हेलर लेने के बावजूद थोड़ी दूर चलने पर उन्हें तकलीफ होने लगती थी। उन्होंने बताया कि तीन महीने के बाद थेरेपी की दूसरी डोज दी जाती है। अभी तक उन्होंने 20 रोगियों को यह थेरेपी दी है। इससे रोगियों की दवा कम हो गई। इसके साथ ही ऑक्सीजन लेने की जरूरत भी कम पड़ी। स्टेम सेल रोगी के शरीर से ही ली जाती हैं। उन्हें एक खास प्रक्रिया से गुजारने के बाद रोगी के शरीर में इन्हें डाल दिया जाता है।