कानपुर। हैलट में दो महीने से स्टेम सेल ओपीडी बंद हो गई है। कुछ लोगों के विवाद पैदा करने और सवाल उठाने के बाद ओपीडी रोक दी गई है। इससे नुकसान रोगियों का हो रहा है। 60 रोगी वेटिंग लिस्ट में हैं। इनमें लगभग सभी रोगी कमजोर आर्थिक स्थिति वाले हैं। इसके साथ ही आठ-10 रोगी ऐसे हैं जिन्हें स्टेम सेल थैरेपी की दूसरी खुराक लेनी है।
हैलट में स्टेम सेल थैरेपी दिए जाने के मामले में कुछ लोगों ने शिकायत की थी कि यह चिकित्सा पद्धति अमान्य है और इसमें वसूली की जा रही है। इस पर केंद्रीय ड्रग इंस्पेक्टरों की टीम ने यहां आकर जांच की। इसके बाद शासन ने कमेटी गठित की है। स्थिति को देखते हुए फिलहाल स्टेम सेल ओपीडी बंद कर दी गई है। इसका खामियाजा रोगियों को भुगतान पड़ रहा है। स्टेम सेल थैरेपी से इलाज कराने के लिए राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड के रोगी यहां आते हैं। ओपीडी हर महीने के तीसरे मंगलवार को चलती है। ओपीडी परीक्षण के बाद रोगी को थैरेपी देने के संबंध में निर्णय लिया जाता है।
जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. संजय काला ने बताया कि 60 रोगी हैं जो इलाज के लिए वेटिंग लिस्ट में है। इनमें सभी कमजोर आर्थिक स्थिति वाले हैं। प्राइवेट हॉस्पिटल में इलाज करा पाने के लिए पैसे नहीं है। निजी क्षेत्र में जो इलाज ढाई-तीन लाख रुपये में मिलता है। वह हैलट में सरकारी फीस पर मिल जाता है। उन्होंने बताया कि जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज का आईआईटी के साथ करार हो गया है। अक्तूबर में एडवांस लेवल की स्टेम सेल थैरेपी शुरू की जाएगी। इसमें आईआईटी की तकनीक का भी फायदा मिलेगा। इसके साथ ही अत्याधुनिक उपकरण भी उपलब्ध हो जाएंगे। इसके साथ ही हैलट में स्टेम सेल बैंक भी बनाया जाना है। इसका प्रस्ताव शासन को भेजा जा चुका है।
चेन्नई में आयोजित इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस रीजेन-2025 में जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज स्टेम सेल से संबंधित शोध प्रस्तुत किया गया। इस शोध में स्टेम सेल थैरेपी का इस्तेमाल क्षतिग्रस्त स्पाइनल कॉर्ड में किया गया है। देश-विदेश के विशेषज्ञों ने इस संबंध में जानकारी ली। स्टेम सेल थैरेपी विशेषज्ञ डॉ. बीएस राजपूत ने शोध प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि कॉन्फ्रेंस का आयोजन इंडियन आर्थोपेडिक एसोसिएशन, इंडियन पेन सोसाइटी, इंडियन कार्टिलेज सोसाइटी आदि संगठनों के बैनर तले किया गया।