स्प्रे के रूप में सीधे पौधों में डाला जाता है
रितिक के अनुसार आठ से 12 इंच लंबे एक किलोग्राम बाल सैलून में 450-500 रुपये में मिल जाते हैं। एक किलो बालों से लगभग 150 ग्राम नाइट्रोजन मिलती है। गाय के गोबर में केवल 0.2 से 0.5 प्रतिशत नाइट्रोजन मिलती है। गोबर की खाद से खेत की मिट्टी में नाइट्रोजन विकसित होने में दो से तीन साल लग जाता है। इसके विपरीत मानव बालों से तैयार फर्टिलाइजर को स्प्रे के रूप में सीधे पौधों में डाला जाता है, जिससे उन्हें 16 प्रतिशत नाइट्रोजन और पोषक तत्व सीधे मिलते हैं।
प्लास्टिक वेस्ट से बनाया फर्नीचर व टाइल्स
सोनल शुक्ला का स्टार्टअप इकोएंसीएस प्लास्टिक कचरे का समाधान लेकर आया है। यह स्टार्टअप दिल्ली और एनसीआर से प्लास्टिक वेस्ट एकत्र कर फर्नीचर और टाइल्स तैयार कर रहा है। अच्छी क्वालिटी वाले प्लास्टिक से खूबसूरत फर्नीचर बनते हैं, जबकि खराब गुणवत्ता के प्लास्टिक से रंगीन पेवमेंट टाइल्स बनाई गई हैं, जिन्हें सीमेंट टाइल्स की जगह लगाया जा सकता है। इनकी लागत बाजार में उपलब्ध टाइल्स के बराबर है, लेकिन मजबूती उससे अधिक है।
गेम से बच्चे समझेंगे खेती-किसानी
शहर के बच्चों को गांव, खेती-किसानी की जानकारी देने के लिए आईआईटी के स्टार्टअप कार्की डिजाइन ने खेती-बाड़ी गेम विकसित किया है। यह गेम बचपन के मोनोपोली या बिजनेस गेम की तरह काम करता है। को-फाउंडर सिल्की गुप्ता के अनुसार इसे दो से पांच लोग खेल सकते हैं। खेल में बच्चों के पास अलग-अलग कार्ड जैसे सीजन, फसल, पैसे, बैंकिंग पॉलिसी और फर्टिलाइजर होते हैं। खेल के दौरान बच्चे सीखते हैं कि आर्गेनिक फसलों को खरीदने के क्या फायदें हैं, यह महंगी क्यों होती हैं, किस मौसम में कौन सी फसल लगाई जाती है।
एयरोमॉडलिंग में एचबीटीयू दूसरे स्थान पर
टेककृति 2026 के तहत आयोजित बोइंग एयरोमॉडलिंग नेशनल चैलेंज (स्काई स्पार्क) में देशभर के युवा इनोवेटर्स ने भाग लिया। प्रतियोगिता में लुधियाना के युवा उद्यमी तनिष ने पहला स्थान हासिल किया। एचबीटीयू कानपुर की टीम ब्लैकआउट ने बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए दूसरा स्थान पाया। इसमें पूरे भारत से करीब 64 टीमों ने हिस्सा लिया। पहले राउंड में 18 टीमों का चयन हुआ, जिसके बाद फाइनल राउंड में शीर्ष टीमों के बीच मुकाबला हुआ। एचबीटीयू की टीम ब्लैकआउट के सदस्य कृष्ण मुरारी गुप्ता, अनुपम नैन, शिवम श्रीवास्तव, अभिसार सिंह और हार्दिक त्रिपाठी ने प्रो. एसवीएआर शास्त्री के नेतृत्व में प्रतियोगिता में हिस्सा लिया।