एक अप्रैल से सड़कों का निर्माण कर सकते हैं बंद
इन्हीं दोनों श्रेणियों के तारकोल का उपयोग सड़कों के निर्माण में होता है। रिफाइनरी से इसे टैंकरों से यहां हाटमिक्स प्लांट तक लाने में करीब ढाई हजार रुपये प्रति टन भाड़ा लगता है। शहर में सड़कों, पेंट निर्माण सहित विभिन्न कार्यों के लिए रोज करीब 500 टन तारकोल की खपत होती है। इसमें से सबसे ज्यादा 250 से 300 टन तारकोल बिटुमिनस (तारकोल मिक्स गिट्टी) वाली सड़कों के निर्माण में लगता है। युद्ध शुरू होने से पहले ईरान, ओमान सहित की देशों से तारकोल आयात किया जाता था। इससे लगभग भाव स्थिर रहता था। अब वहां से तारकोल आना बंद हो गया है। ठेकेदारों ने बताया कि तारकोल के दाम करीब डेढ़ गुना बढ़ने से सड़कों के निर्माण की लागत बढ़ गई है। हालात ऐसे ही रहे, तो वे एक अप्रैल से सड़कों का निर्माण बंद कर देंगे।
युद्ध की वजह से तारकोल की किल्लत होने लगी है। फिर भी ठेकेदारों से जल्द से जल्द सड़कों का निर्माण पूरा कराने की कोशिश की जा रही है। चालू वित्तीय वर्ष में 15वें वित्त के तहत 90 करोड़ से बनने वाली 200 में 156 सड़कों का काम पूरा हो गया है। शेष 34 में से 28 कार्य सीवर लाइन, वाटर लाइन की वजह से रुके हैं। नगर निगम निधि के 200 करोड़ में से 180-190 करोड़ रुपये की सड़कें बन चुकी हैं। -एसएफए जैदी, मुख्य अभियंता, नगर निगम
जो कार्य चल रहे हैं, ठेकेदारों से उन्हें जल्द से जल्द पूरा करने के लिए कहा है। जिन कार्यों के लिए टेंडर प्रक्रिया चल रही है, इसे जल्द पूरा कर काम कराने की योजना है। उम्मीद है कि जल्द तारकोल की किल्लत दूर होगी। -अनिल कुमार, अधीक्षण अभियंता, पीडब्ल्यूडी