सर्व शिक्षा अभियान की नई पहल की पोल खुलती नजर आ रही है। सर्व शिक्षा अभियान के तहत परिषदीय स्कूलों को दी जाने वाली किताबों में चालू सत्र में कई अच्छे प्रयोग किए गए हैं। प्रत्येक कक्षा और विषय की किताब में पाठ्यक्रम का मासिक विभाजन किया गया है।
इसके बावजूद बच्चों तक यह पहुंच ही नही पाई और इस योजना ने किताबों में ही दम तोड़ दिया। खास बात यह है कि इस वर्ष इसका लाभ स्टूडेंटों और शिक्षकों को नही मिल पाएगा। सत्र शुरू होने के पांच माह बाद किताबें विद्यार्थियों के बैग तक नहीं पहुंच सकी हैं। परिषदीय स्कूलों का शैक्षणिक सत्र अप्रैल से शुरू हुआ। पुस्तक में मासिक विभाजन के आधार पर अब तक आधे से अधिक पाठ्यक्रम खत्म हो जाना चाहिए था।
अक्तूबर में अर्द्घवार्षिक परीक्षा का समय निर्धारित किया गया है। पाठ्यक्रम में सत्र, अर्द्घवार्षिक और वार्षिक परीक्षा का समय दिया गया है। शिक्षा विभाग की इस बेहतरीन पहल ने किताबों में ही दम तोड़ दिया। किताब वितरण के जिला समन्वयक रजनीकांत पांडेय ने बताया कि अभी कुछ किताबे ही आ पाई हैं।
अन्य किताबों के आने के बाद ही कमेटी के सामने निरीक्षण के बाद किताबों का वितरण होगा। बीएसए अंबरीश यादव ने कहा कि किताबें मिलने के बाद ही वितरण होगा। फीडबैक की भी व्यवस्था किताबों में संबंधित विषय के ज्ञान के संबंध में अभिभावकों, विद्यार्थियों से फीडबैक लेने की भी व्यवस्था की गई है।
इसके लिए किताब में तीन पन्ने अलग से हैं। अभिभावक अगर खुद लिखने में सक्षम नहीं है तो किसी का सहारा भी ले सकते हैं। विषय के साथ अन्य जरूरी जानकारी भी शामिल किताबों के अंतिम पन्ने पर विद्यार्थियों को आगे बढ़ने के लिए जरूरी जानकारी दी गई है। इसमें राष्ट्रीय प्रतिभा खोज परीक्षा, राष्ट्रीय आय एवं योग्यता आधारित छात्रवृत्ति योजना सहित परीक्षा की पूरी जानकारी दी गई है। आवेदन से लेकर उसकी राशि के बारे में भी बताया गया है।