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Kanpur News: कंबल के मोह में खुले आसमान के नीचे गुजारते रात

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ठंड में रात में खुले आसमान के नीचे सोते लोग। - फोटो : संवाद
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कानपुर। सर्दियों के मौसम में रात में सैकड़ों लोग खुले में सोने पर मजबूर हैं। यह हाल तब हैं जब जगह-जगह रैन बसेरे खुले हैं। रविवार रात 10 बजे विभिन्न क्षेत्रों में पड़ताल की गई तो जरीब चौकी, फजलगंज और शास्त्रीनगर में बड़ी संख्या में लोग खुले आसमान के नीचे सोते मिले। इनमें से कई को रैन बसेरे के बारे में जानकारी नहीं थी तो कई ऐसे थे जो कंबल मिलने के माेह में खुले में सोना पसंद करते हैं। उनका कहना है कि सड़क किनारे सोने से कई लोग कंबल देने आते हैं।
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शहर में गैर राज्यों और जिलों से लोग भीख मांगने शहर आते हैं। रैन बसेरों में बुनियादी सुविधाओं की कमी, साफ-सफाई का अभाव और सुरक्षा को लेकर असमंजस के कारण बेघर लोग वहां जाने से कतराते हैं। शास्त्रीनगर में सड़क किनारे सो रहे फतेहपुर निवासी पप्पू सिंह ने बताया कि उन्हें रैन बसेरे के बारे में जानकारी नहीं है। ओस गिरने पर वह तिरपाल डालकर सो जाते हैं। रीवा की वर्षा ने कहा कि भीख मांगने के लिए 10 दिन पहले ढाई माह के बच्चे को लेकर शहर आई थी। रैन बसेरे के बारे में जानकारी नहीं है। सड़क किनारे सोने से उन्हें कंबल भी मिलता है।
मध्य प्रदेश रीवा के आशीष ने बताया कि सड़क किनारे सोने से कंबल मिलता है। इस वजह से वह कहीं नहीं जाते। फजलगंज में दुकान के नीचे सो रहे हरदोई के उत्तम ने बताया कि दिहाड़ी मजदूरी के लिए आए हैं। गुमटी बाजार के पास सुबह जल्दी उठकर पहुंच जाते हैं। वहां फिर काम पर निकल जाते हैं। इसी तरह अन्य स्थानों पर मिले लोगों ने भी कंबल मिलने की आस में रैन बसेरे के बजाय खुले में रात गुजारने की बात कही।
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ऑटो बुक करके स्टेशन के लिए हुए रवाना

रीवा से करीब 200 लोग भीख मांगने के लिए शहर आए हैं। इसमें से रविवार रात को दो ऑटो बुक करके उसमें 10 पोटलियों में कंबल व अन्य भरकर कुछ लोग स्टेशन के लिए रवाना हो गए।
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