उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव (फाइल फोटो)
अखिलेश यादव को विधानसभा चुनाव 2017 में मुख्यमंत्री का चेहरा नहीं मानने की जिद पकड़े मुलायम सिंह को मनाने के लिए उनके गुरु उदय प्रताप सिंह भी मैदान में कूद पड़े हैं। यादव महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उप्र हिंदी परिषद के चेयरमैन उदय प्रताप मुलायम सिंह के शिक्षक भी रहे हैं। वे भी मानते हैं कि बिना अखिलेश यादव के सपा का अस्तित्व नहीं बचेगा।
अगले चुनाव में बिना अखिलेश के पार्टी को बड़ा नुकसान हो सकता है। यही वजह है कि वे किसी भी सूरत में नेताजी को अपने फैसले पलटने के लिए समझाने में जुटे हैं। इस काम में यादव महासभा के दूसरे पदाधिकारियों ने भी पूरा जोर लगाया है। नेताजी के परिवार में राजनैतिक महत्वाकांक्षा को लेकर चल रही लड़ाई रुकने के बजाय बढ़ती जा रही है।
सोमवार शाम पार्टी के महासचिव किरनमय नंदा के जरिये जब यह बात कही गई कि अखिलेश यादव ही सीएम का चेहरा होंगे तो एक झटके में लगा कि पूरा मामला सुलझ गया है, लेकिन थोड़ी देर बाद ही यह बात भी सामने आई कि नेताजी ने इस फैसले पर अपनी रजामंदी नहीं दी है। उसके बाद फिर से स्थिति जस की तस हो गई।
अब पता चला है कि यादव महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष फिर से अपने गुरु होने का प्रभाव नेताजी पर रखेंगे। यह भी बताएंगे कि उनकी इस जिद की वजह से आगे किस तरह की स्थिति पैदा होने वाली है। इसी तरह यादव सभा के प्रदेश महामंत्री और दर्जाप्राप्त मंत्री जगदेव सिंह का कहना है कि अखिलेश के बिना सपा का कोई मतलब नहीं है। पार्टी को आगामी चुनाव में यदि बढ़त लेनी है तो उसे अखिलेश को ही सीएम का चेहरा बनाना होगा।