बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने अद्धवार्षिक परीक्षाओं का मजाक बना कर रख दिया है। परीक्षा के पहले दिन विद्यालयों में पेपर न पहुंचने पर हिंदी की परीक्षा स्थगित कर दी गई। स्कूल पहुंचे बच्चों ने घंटों परीक्षा शुरू होने का इंतजार किया। इस दौरान स्कूलों के प्रधानाचार्य नदारद रहे और शिक्षक बातों में मशगूल। छात्र भी कक्षा में खेलते नजर आए।
पहले दिन सभी कक्षाओं में हिंदी की परीक्षा कराई जानी थी। लेकिन पेपर न पहुंचने पर परीक्षा स्थगित कर दी गई। जिस कारण अब हिंदी की परीक्षा 25 अक्टूबर को होगी। अन्य परीक्षाएं विधिवत चलेंगे। सोमवार को बीएसए कार्यालय और बीआरसी कार्यालय पर शिक्षकों को अर्द्धवार्षिक परीक्षाओं के पेपर वितरित किए गए।
जिला बेसिक शिक्षाधिकारी एसपी यादव ने बताया कि परीक्षाएं अब विधिवत चलेंगी। पहले दिन की परीक्षा 25 अक्टूबर को होगी। पेपर देरी से लाने वाले फर्म के खिलाफ सख्त कदम उठाया जाएगा। इस संबंध में विभाग के उच्चाधिकरियों से बात की जा रही है।
इंतजार के बाद मिली पेपर स्थगित होने की खबर
यह ग्राम बरमूपुर का प्राथमिक विद्यालय है। जब स्कूल के बरामदे में बैठे शोर मचा रहे थे। मौजूद शिक्षकों ने बताया कि पेपर न आने के कारण परीक्षा नही कराई जा रही है। विद्यालय प्रधानाचार्या पेपर लेने के लिए बीएसए कार्यालय गईं हैं। पेपर आ जाते है तो परीक्षा होगी वरना बच्चों को घर भेज दिया जाएगा।
समय 9 :40मिनट
छात्र ने संभाली टीचर की कमान
इसी गांव के पूर्व माध्यमिक विद्यालयों का हाल भी प्राथमिक विद्यालय जैसा ही रहा। तीन कमरों में चार से पांच बच्चे अकेले कुर्सियों पर बैठे दिखे। यहां भी शिक्षकों ने बताया कि प्रधानाचार्या पेपर लेने गईं हैं। पेपर आते ही बच्चों का पेपर कराया जाना है। लेकिन तब तक शिक्षकों ने कक्षाओं के ब्लैक बोर्ड की तारीख भी नहीं बदली थी। फोटो खिंचते देख शिक्षक के कहने पर एक बच्चे ने बोर्ड की डेट बदली।
कक्षा में खेलते मिले छात्र
प्राथमिक विद्यालय गुरूहाई के विद्यालय की स्थिती कुछ अन्य विद्यालयों जैसी रही। यहां भी शिक्षक बातों में व्यस्त दिखे। कक्षा में बच्चे जिंगले में चढ़कर व आपस में खेलते दिखे। यह स्थित अन्य कमरों में भी रही।
पहले बांटी कापियां फिर वापस ली
गुरूहाई प्राथमिक स्कूल में शिक्षकों ने बताया कि आज परीक्षा कराई जानी है। फिर आनन-फानन में एक शिक्षका ने तेजी से बच्चों को कापी बांट दी। बच्चों को शिक्षक ने कापी वितरित की ही थी कि तभी पेपर न होने की सूचना फोन पर मिली तो कापी वापस लेकर बच्चों को घर भेज दिया गया।