लोकसभा चुनाव का एलान हो चुका है। भाजपा ने उम्मीदवार का ऐलान कर दिया है। पिछला चुनाव न लड़ने वाली बसपा ने भी प्रत्याशी घोषित कर दिया है। इन सबके बीच सूबे की मुख्य विपक्षी पार्टी सपा ने अपने पत्ते नहीं खोले हैं। पिछले दिनों कन्नौज लोकसभा के प्रभारी बनाए गए बदायूं के पूर्व सांसद धर्मेंद्र यादव को आजमगढ़ से उम्मीदवार बना दिया गया है। अब सभी की निगाहें सपा के उम्मीदवार पर है।
इत्रनगरी के सियासी दंगल में जोर आजमाइश के लिए समाजवादी पार्टी की ओर से पत्ते न खोलने से न सिर्फ प्रतिद्वंदी बल्कि खुद पार्टी के कार्यकर्ता भी असमंजस में हैं। कार्यकर्ताओं के बीच हालांकि चर्चा यही है कि पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ही खुद यहां से चुनाव लड़ेंगे। खुद पिछले एक साल में कई बार अखिलेश यादव भी इस बात का इशारा कर चुके हैं। हालांकि कुछ दिन से चर्चा थी कि वह कन्नौज से ज्यादा आजमगढ़ पर ध्यान दे रहे हैं। बाद में फिर चर्चा का रुख बदला और उनके दोनों ही सीट से चुनाव लड़ने की बात जोर पकड़ने लगी।
इस बीच आजमगढ़ में उनकी ओर से बिछाई गई सियासी बिसात से यह इशारा मिलने लगा कि अखिलेश यादव की दिलचस्पी वहां ज्यादा है। कुछ दिन पहले बदायूं से घोषित उम्मीदवार और वहां के सांसद रहे धर्मेंद्र यादव को कन्नौज के साथ ही आजमगढ़ लोकसभा का प्रभारी बनाने से नई चर्चा शुरू हो गई। माना गया कि धर्मेंद्र भी यहां से उम्मीदवार हो सकते हैं। हालांकि पार्टी की ओर से एक दिन पहले जारी चौथी लिस्ट में धर्मेंद्र यादव को आजमगढ़ से ही उम्मीदवार बनाने का एलान किया गया है। ऐसे में इस बात की चर्चा तेज हो गई है कि अखिलेश यादव कन्नौज से ही चुनाव लड़ेंगे।