समाजवादी पार्टी ने शनिवार को उत्तर प्रदेश की दो वीआईपी सीटों पर अपने उम्मीदवारों की घोषणा की है। यूपी की वीआईपी सीटों में शुमार कानपुर सीट से भाजपा, प्रसपा और कांग्रेस के प्रत्याशियों की घोषणा के बाद आखिरकार सपा ने अपने पत्ते खोल ही दिए हैं।
सपा ने कानपुर सीट से राम कुमार को लोकसभा चुनाव 2019 का टिकट थमाया है। कानपुर सीट के लिए सपा से प्रत्याशियों की दौड़ में राम कुमार का नाम कहीं भी शामिल नहीं था। ऐसे में अचानक से राम कुमार को कानपुर सीट से प्रत्याशी घोषित कर सपा ने सभी को चौंका दिया है।
पार्टी ने ब्राह्मण और ठाकुर बिरादरी पर दांव लगाने की बनाई थी रणनीति
अखिलेश यादव
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उन्नाव के पूर्व विधायक रामकुमार निषाद को सपा ने कानपुर से टिकट दिया है। सपा-बसपा गठबंधन वाली यह सीट सपा के खाते में है। शुरू में पार्टी ने ब्राह्मण और ठाकुर बिरादरी पर दांव लगाने की रणनीति बनाई थी, इसी बीच भाजपा से ब्राह्मण प्रत्याशी उतारने जाने की वजह से ऐन वक्त पर रणनीति बदल दी गई।
यहां से प्रत्याशी बनाए जाने के पीछे पिछड़ा, दलित और मुस्लिम गठजोड़ की रणनीति बताई गई है। महानगर में निषाद के साथ बाथम, मांझी और कश्यप बिरादरी के मतदाताओं की संख्या वैसे तो सिर्फ 20 हजार के आसपास है, लेकिन कुल पिछड़ी जातियों से जुड़े मतदाताओं की संख्या करीब 2 लाख 90 हजार है।
सीएम योगी आदित्य नाथ के गढ़ में सपा ने खेला निषाद कार्ड
अखिलेश यादव- सीएम योगी आदित्यनाथ (फाइल फोटो)
राम कुमार निषाद का राजनीतिक क्षेत्र उन्नाव रहा है, लेकिन उनके पिता दिवंगत मनोहर लाल कानपुर से सांसद और प्रदेश सपा सरकार में मंत्री भी रहे हैं। राम कुमार के भाई दिवंगत दीपक कुमार भी उन्नाव से विधायक रहे हैं।
वहीं यूपी के सीएम योगी आदित्य नाथ के गढ़ में सपा ने निषाद कार्ड खेलते हुए रामभुआल निषाद को अपना प्रत्याशी घोषित किया है। गोरखपुर और कानपुर लोकसभा सीट सभी राजनीतिक दलों के लिए बेहद खास हैं। चुनावी उठापटक के बीच काैन सा दल इन सीटों पर कब्जा जमाता है यह देखना बेहद दिलचस्प होने वाला है।