कानपुर। कानपुर की आयुध इकाइयों में बने 105 एमएम आर्टिलरी सिस्टम और छोटे हथियारों में दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों ने रुचि दिखाई है। मलयेशिया की राजधानी कुआलालंपुर में 19 अप्रैल को शुरू हुई डिफेंस सर्विस एशिया (डीएसए) 2026 प्रदर्शनी में देश के रक्षा उद्योग ने अब तक की सबसे बड़ी भागीदारी दर्ज कराई है। भारत सरकार ने पहली बार इंडिया पवेलियन के निर्माण एवं प्रबंधन की जिम्मेदारी कानपुर स्थित एडवांस्ड वेपंस एंड इक्विपमेंट इंडिया लिमिटेड (एडब्ल्यूईआईएल) को दी है। प्रदर्शनी 23 अप्रैल तक लगेगी।
एडवांस्ड वेपंस एंड इक्विपमेंट इंडिया लिमिटेड के डायरेक्टर आपरेशंस किशोर गुरदासानी ने बताया कि दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों से 105 मिमी आर्टिलरी सिस्टम और छोटे हथियारों के प्रति विशेष रुचि देखने को मिली है। यद्यपि यह प्रारंभिक पूछताछ अभी अनुबंधों में परिवर्तित नहीं हुई है लेकिन क्षेत्र में बढ़ती रुचि भविष्य के लिए आशाजनक संकेत देती है। वैश्विक रक्षा सहयोग की दिशा में महत्वपूर्ण कदम डीएसए 2026 में भारत की सशक्त भागीदारी, रक्षा निर्यात को बढ़ावा देने, अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों को मजबूत करने और एक विश्वसनीय वैश्विक रक्षा आपूर्तिकर्ता के रूप में अपनी पहचान स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। भारत सरकार और उद्योग जगत के संयुक्त प्रयास देश को वैश्विक रक्षा बाजार में एक प्रमुख शक्ति के रूप में स्थापित करने की दिशा में निरंतर आगे बढ़ रहे हैं।
उन्होंने बताया कि इस दौरान मलयेशिया इंटरनेशनल ट्रेड एंड एग्ज़िबिशन सेंटर में एडब्ल्यूईआईएल की ओर से बनाए गए इंडिया पवेलियन का उद्घाटन भारत सरकार के अतिरिक्त सचिव (रक्षा उत्पादन) दिनेश महोर और मलयेशिया में भारत के उच्चायुक्त बीएन रेड्डी ने संयुक्त रूप से किया। प्रदर्शनी के दौरान मलयेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम ने भी इंडिया पवेलियन का दौरा किया और देश की व्यापक और सुदृढ़ भागीदारी की सराहना की। प्रदर्शनी में रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम, आईडेक्स, स्टार्टअप्स और एमएसएमई समेत कुल 25 कंपनियां शामिल हैं। यह भागीदारी डीएसए के इतिहास में भारत की अब तक की सबसे महत्वपूर्ण उपस्थिति है। मुनिशंस इंडिया लिमिटेड के डायरेक्टर (ऑपरेशंस) राकेश ओझा ने कहा कि डीएसए मलयेशिया भारतीय कंपनियों के लिए एक उत्कृष्ट मंच है जहां उन्हें मलयेशियाई सेना सहित विभिन्न रक्षा हितधारकों से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है।