उसके बताए स्थान पर जब पुलिस ने खुदाई शुरू कराई तो सड़ांध आते ही पुलिस को समझने में देर न लगी कि जयपाल जो कह रहा है, वह एकदम सही है। फिर कुछ देर में रामजानकी का क्षत विक्षत शव भी मिल गया। जिस वक्त पुलिस ने जयपाल के सामने उसकी मां का शव रखा, उस वक्त भी उसकी आंख में प्रायश्चित का एक आंसू भी न था, वह तो शव को ऐसे देखता रहा जैसे कि शव उसकी मां का न होकर किसी और का हो।
पूरा गांव खासतौर पर महिलाएं जयपाल को कोसती रहीं कि ऐसी औलाद से तो बिना औलाद होना ही अच्छा जो कि बुढ़ापे का सहारा बनने की बजाए जान का दुश्मन ही बन जाए। घटना की सूचना पाकर नजदीक के गांवों में ब्याही रामजानकी की दो बेटियां भी मौके पर पहुंची और वे भी अपने भाई को कोसती नजर आईं।
जयपाल की मानसिक स्थिति का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि वह न सिर्फ मां की हत्या कर शव की पहरेदारी करता रहा बल्कि उसने घर के दरवाजे पर अपनी टूटी फूटी हिंदी में कागज में लिखकर चस्पा कर रखा था कि अंदर आना सकत मना है। इसके अलावा वह दिन भर स्वयं ही दरवाजे पर बैठा रहता था, ताकि कोई घर के भीतर न चला जाए। ग्रामीणों का कहना है कि भले ही जयपाल की मानसिक स्थिति ठीक न हो लेकिन मां बेटे में विवाद भी बहुत कम ही होता था। पता नहीं बेटे के दिमाग में ऐसी कौन सी बात घर कर गई कि उसने उस मां को ही मौत के घाट उतार दिया।
जमीन तो नहीं बनी हत्या की वजह
पुलिस अधिकारियों की मानें तो हत्या की कोई ठोस वजह तो समझ नहीं आ रही है। रामजानकी के पति गरीबा के नाम पर पांच बीघा जमीन थी, जो कि दोनों मां बेटे के हिस्से में आधी आधी आई है। हो भी सकता है कि उसी जमीन के लालच में जयपाल ने मां की हत्या न की हो। इस बिंदु पर भी आरोपी से पूछताछ की जा रही है।