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‘मेरे खून का एक-एक कतरा लेकर चढ़ा दो’, कोविंद की ये बात सुन फफक पड़ी थी बहन

Fri, 21 Jul 2017 09:19 AM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
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रामनाथ कोविंद
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शालीनता और सहजता के प्रतीक राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद जनता के लिए तो समर्पित हैं ही साथ ही परिवार से भी बहुत लगाव है। 1980 में अपनी बहन की बीमारी पर अपने शरीर के खून का एक-एक कतरा देने को तैयार हो गए। भाई की भावुकता देखकर बीमार बहन भाई से लिपटकर बहुत रोईं। 
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गांव में पढ़ाई करने के बाद आगे की पढ़ाई करने कानपुर शहर आए थे। वे लाल इमली क्वार्टर में अपनी बहन गोमती देवी के घर रहते थे। यहां रहकर उन्होंने नौंवी से स्नातक तक की पढ़ाई की। सबसे बड़ी होने की वजह से गोमती देवी ने उन्हें लड़के की तरह पाला। वे भी उनसे बहुत प्रेम करते थे। वर्ष 1980 में गोमती देवी बीमार हुईं, काफी दिन तक लाला लाजपत राय चिकित्सालय (हैलट) में इलाज चलता रहा। हालत में सुधार न देख भावुक कोविंद ने डाक्टर से कहा कि मेरे खून का एक-एक कतरा लेकर बहन को चढ़ा दो।
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हर कोई उनसे प्रेम करता था

रामनाथ कोविंद
रामनाथ ने कहा था कि मेरा जो भी हो लेकिन बहन को कुछ नहीं होना चाहिए। भाई को कुछ न हो इसलिए बहन गोमती देवी ने खून की कमी होते हुए भी भाई का खून नहीं लिया। विधिवत इलाज हुआ और उनकी बहन ठीक हो गईं। तब वे राजनीति में शामिल नहीं हुए थे। यह जानकारी उनके भांजे और गोमती देवी के पुत्र श्याम बाबू गोविंद ने दी। वे इस समय गुरु नारायण खत्री इंटर कॉलेज में ड्राइंग के शिक्षक हैं। उनका कहना है कि वे बहुत शालीन थे। उनका व्यक्तित्व ऐसा था कि हर कोई उनसे प्रेम करता था। उन्होंने बताया कि गोमती देवी की मौत 1997 में हुई। 
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