शालीनता और सहजता के प्रतीक राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद जनता के लिए तो समर्पित हैं ही साथ ही परिवार से भी बहुत लगाव है। 1980 में अपनी बहन की बीमारी पर अपने शरीर के खून का एक-एक कतरा देने को तैयार हो गए। भाई की भावुकता देखकर बीमार बहन भाई से लिपटकर बहुत रोईं।
गांव में पढ़ाई करने के बाद आगे की पढ़ाई करने कानपुर शहर आए थे। वे लाल इमली क्वार्टर में अपनी बहन गोमती देवी के घर रहते थे। यहां रहकर उन्होंने नौंवी से स्नातक तक की पढ़ाई की। सबसे बड़ी होने की वजह से गोमती देवी ने उन्हें लड़के की तरह पाला। वे भी उनसे बहुत प्रेम करते थे। वर्ष 1980 में गोमती देवी बीमार हुईं, काफी दिन तक लाला लाजपत राय चिकित्सालय (हैलट) में इलाज चलता रहा। हालत में सुधार न देख भावुक कोविंद ने डाक्टर से कहा कि मेरे खून का एक-एक कतरा लेकर बहन को चढ़ा दो।