तकनीक की मदद से आने वाले चार-पांच वर्षों में बैंकों, फर्मों और कंपनियों में सॉफ्टवेयर के जरिये स्वत: ऑडिट होने लगेंगे। इससे फर्जीवाड़ा, घपले, घोटाले, बैंकिंग फ्रॉड समय रहते पकड़ लिए जाएंगे। बैंकों में एनपीए कम होंगे। दरअसल अभी बहुत सी चीजें ऑडिट होने के बाद पकड़ में आती हैं। सॉफ्टवेयर से चीजें समय-समय पर सामने आती रहेंगी। ये बातें बंगलूरू से आए सीए सौरभ गोयनका ने शुक्रवार को कानपुर सिविल लाइंस स्थित रागेंद्र स्वरूप ऑडिटोरियम में कहीं।
यहां सीए संस्थान के डिजिटल एकाउंटिंग बोर्ड व सेंट्रल इंडिया रीजनल काउंसिल की ओर से डिजिटल एकाउंटिंग पर दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन करवाया जा रहा है। सौरभ ने बताया कि सीए संस्थान एबीसीडी तकनीक यानी आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस, ब्लॉक चेन, साइबर सिक्योरिटी व डाटा एनालिसिस तकनीक अपनाने पर जोर दे रहा है। बताया गया कि देश में आईसीआईसीआई बैंक रोबोटिक तकनीक पर काम कर रहा है।
अन्य बैंक भी इसे धीरे-धीरे अपना रहे हैं। रोबोटिक तकनीक से फ्रॉड कम होते हैं क्योंकि वह सिर्फ मानकों पर काम करता है। इसके अलावा नोटों की छंटनी करना, सड़े गले नोटों को अलग करना, सिक्के गिनने का काम पहले से ही अधिकतर बैंक अपना रहे हैं।
सीए के लिए इसलिए जरूरी है तकनीक
डिजिटल एकाउंटिंग बोर्ड के चेयरमैन सीए मनु अग्रवाल ने समझाया कि सीए के लिए एबीसीडी तकनीक क्यों जरूरी है। बताया कि सीए को अब सिर्फ शहर या देश के भीतर की स्थितियों के बारे न सोचकर वैश्विक सोच और तकनीक रखनी होगी। अब विदेश में भी कारोबार हो रहे हैं। भुगतान से लेकर तमाम आंकड़ों की जरूरत तत्काल होती है। डाटा सहेजना महत्वपूर्ण पहलू हो गया है।
इनकी रही भागीदारी
कार्यशाला में रीजनल काउंसिल के चेयरमैन मुकेश बंसल, सचिव अभिषेक पांडेय, सदस्य अतुल मेहरोत्रा, डिजिटल एकाउंटिंग बोर्ड के वाइस चेयरमैन दया निवास शर्मा, रीजनल काउंसिल के पूर्व चेयरमैन दीप कुमार मिश्रा, सचिन देढ़िया, अनिल सक्सेना, छवि जैन, सीए गरिमा सिंह, सीए दीपक सिंह आदि मौजूद रहे।