फतेहपुर जिले में पुलिस की सुपुर्दगी से 62 लाख की मौरंग चोरी प्रकरण की जांच में दोषी माने गए तत्कालीन थानेदार निशिकांत राय को निलंबित किया गया है। मामले में एसपी ने प्रकरण की तेजी से जांच के लिए सीओ सिटी को जांच करने के आदेश दिए हैं।
हुसैनगंज थानाक्षेत्र के देवरी मोड़ से लेकर असनी तक अवैध मौरंग के डंप लगाए गए थे। खनन और राजस्व टीम ने 27 डंप सीज किए थे। सीज डंप पुलिस की सुपुर्दगी में दिए गए थे। उसके बाद डंप उन स्थानों से धीरे धीरे चोरी हो गए। इसका खुलासा खनन विभाग की नीलामी के दौरान हुआ था।
विभाग की लिखापढ़ी के बाद मामले में तत्कालीन थानेदार निशिकांत राय ने अज्ञात चोरों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की थी। उसके बाद तत्कालीन थानेदार का हमीरपुर जिला स्थानांतरण हो गया था। पुलिस सुपुर्दगी से मौरंग चोरी प्रकरण ने तूल पकड़ा तो सीओ सदर संजय सिंह ने जांच शुरू की।
मामले का खनन निदेशक डॉ. रोशन जैकब ने संज्ञान में लिया। जांच में थानेदार निशिकांत राय दोषी पाए गए। यहां से रिपोर्ट खनिज निदेशालय को दिसंबर माह की शुरुआत में भेजी गई थी। जिसके बाद प्रयागराज जोन एडीजी प्रेम प्रकाश ने थानेदार के निलंबन की संस्तुति की।
इधर, मामले की जांच में तेजी आई। अब जांच अपर पुलिस अधीक्षक राजेश कुमार को सौंपी गई है। विवेचना दौरान प्रकाश में आए 12 आरोपी कामता सिंह, चंद्रवीर सिंह, विवेक सिंह, सूर्यवीर सिंह, सत्यम सिंह, कैलाश, शिवप्रसाद, श्यामवीर सिंह, भोला सिंह, आकाश, विकास पटेल, मनोज पांडेय 4 दिसंबर को नामजद हुए थे।
पुलिस ने मौरंग ढेर जिन जगहों पर थे उसके हिसाब से ही आरोपी बनाए। इस तरह से 15 आरोपियों के भी नाम प्रकाश में लाया जाना बाकी है। एसपी सतपाल अंतिल ने बताया कि तत्कालीन थानेदार को निलंबित कर दिया गया है।
जांच प्रभावित करने को डंपों में मौरंग फिर से पहुंचाई
पुलिस ने पहले तो मौरंग चोरी कराई अब लीपापोती के लिए चोरी के आरोपियों ने डंपों पर मौरंग फिर से पहुंचाई है। यह काम भी पुलिस की देखरेख में हो रहा है। दरअसल मौरंग चोरी के आरोपियों की सिफारिश में एक नेता जुटे हैं। वह किसी तरह से मामले को दफन कराना चाहते हैं।
मौरंग चोरी भी उनके इशारे पर हुई थी। वह मौरंग को उसी जगह पर दोबारा डंप कर यह साबित करना चाहते हैं सीज करने की कार्रवाई गलत हुई थी। उसी समय से मौरंग मौके पर मौजूद है। जो लोग चोरी के आरोपी बनाए गए हैं। वह सभी निर्दोष हैं। मामले में बड़ा पेंच फंसा है।
एफआईआर मौरंग रखवाली करने वाले बीट के सिपाहियों की ओर से कराई गई थी। उस समय खनन विभाग ने दो बार नीलामी की सूचना जारी की थी। मौरंग मौके पर मौजूद न होने के कारण ही नीलाम नहीं हो सकी थी। एसपी सतपाल अंतिल ने बताया कि पूरे घटनाक्रम की सही और जल्द से जल्द जांच पूरी करने के सीओ सिटी को जांच सौंपी गई है।
आरोपित ढाबा संचालकों पर पुलिस मेहरबान
विवेचना में तीन ढाबा संचालक समेत 15 आरोपी अभी प्रकरण में बचे हैं। ढाबा संचालकों और पुलिस का तगड़ा गठजोड़ है। दो बेरागढ़ीवा और एक असनी का ढाबा संचालक है। इन ढाबों पर पुलिस का मुफ्त में खाना पानी होता है। पुलिस इस एहसान में भी दबी है। शायद इसी वजह से ढाबा संचालकों के नाम उजागर करने से कतरा रही है।