हाईकोर्ट ने डेंगू से हो रही मौतों के मद्देनजर सरकारी प्रयासों को नाकाफी बताया
कानपुर में अब तक 2700 लोगों को ‘डेंगू डंक’ लग चुका है। स्वास्थ्य विभाग इस बीमारी को नियंत्रित करने के बजाय आंकड़ों में इस बीमारी को दबाने में जुटा है। विभाग की मानें तो नगर में अब तक मात्र 83 मरीजों में डेंगू की पुष्टि हुई है। किसी मरीज की मौत से भी इनकार किया जा रहा है।
हाईकोर्ट ने डेंगू से हो रही मौतों के मद्देनजर सरकारी प्रयासों को नाकाफी बताते हुए 25 अक्तूबर को सरकार से पूछा कि उत्तर प्रदेश में क्यों न राष्ट्रपति शासन लगाने की सिफारिश कर दी जाए। ऐसी स्थितियों के मद्देनजर यहां पड़ताल की गई तो स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही उजागर हुई। जीएसवीएम मेडिकल कालेज के माइक्रोबायोलॉजी विभाग के रिकार्ड बताते हैं कि वहां डेंगू जैसे लक्षणों वाले 6300 मरीजों की जांच हुईं। इनमें से 2713 मरीजों में डेंगू की पुष्टि हुई। 19 मरीजों की मौत भी हो चुकी है। डेंगू के ज्यादातर मरीज यहीं के हैं। जिला एपीडेमिक अधिकारी डॉ. देव सिंह डेंगू के 2700 मरीज मिलने की पुष्टि तो कर रहे हैं, पर उनका दावा है कि नगर के मरीज मात्र 83 हैं। प्रदेश के 39 जिलों के अलावा दिल्ली, मध्य प्रदेश और बिहार से भी डेंगू के मरीजों के यहां जांच और इलाज के लिए आने का दावा किया। हालत यह है कि बुधवार को भी हैलट, उर्सला से लेकर निजी चिकित्सालयों में डेंगू जैसे लक्षणों वाले मरीज बहुतायत में पहुंचे। इनमें से 94 मरीजों के खून के नमूनों की जांच हुई, जिनमें से 28 मरीजों में डेंगू की पुष्टि हुई।