पुखरायां में रेल हादसा इतना भयानक था कि सुबह से रात और फिर रात से अगले दिन तक आंसू, चीख, सिसकियों और दर्द का सिलसिला जारी रहा। पुलिस के खोजी कुत्ते सुबह से ही बोगियों में फंसी लाशें तलाशते रहे। कानपुर देहात के जिला प्रशासन ने अब तक 129 से अधिक यात्रियों के मरने की बात कही है। वहीं घायलों की संख्या 310 से भी ज्यादा हो चुकी है।
बोगियों में अभी भी कई लाशों के दबे होने की सूचना है जिसके लिए सेना के अलावा पुलिस प्रशासन और समाज सेवी संगठन व क्षेत्रीय लोग सोमवार सुबह से लगी डटे हुए हैं। घायलों बेहतर उपचार के लिए दिल्ली और मध्य प्रदेश से आई स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की टीम ने भी अपना काम तेज कर दिया है।
हादसे ने एक मर्तबा फिर से कानपुर की साम्प्रदायिक एकता की तस्वीर उजागर की है। एक ओर हैलट घायलों की चीख पुकार से गूंज रहा है, तो वहीं हिंदू हो या मुस्लिम या फिर सिख किसी के भी हाथ खाली नहीं दिख रहे थे। हर कोई हाथों में चाय, पानी तो कोई सब्जी रोटी और बिस्कुट बांटता नगर आ रहा है।
रेल संरक्षा आयुक्त ने शुरू कर दी हादसे की जांच
इंदौर-पटना एक्सप्रेस हादसे की जांच कोलकाता पूर्वी सर्किल के मुख्य रेल संरक्षा आयुक्त पीके आचार्या ने शुरू कर दी है। वह आज और कल कानपुर सेंट्रल स्टेशन के उप मुख्य यातायात प्रबंधक (डिप्टी सीटीएम) के कक्ष में बैठकर जांच करेंगे। उत्तर मध्य रेलवे के सीपीआरओ विजय कुमार ने बताया कि जिन यात्रियों या आम लोगों को इस घटना के बारे में कोई जानकारी हो या साक्ष्य हों, वह तुरंत आकर संपर्क कर सकता है। लोगों की मदद से हादसे की सही जानकारी का पता लगाने में रेलवे को आसानी होगी।