कानपुर जिले में बेरोजगार युवाओं को अपना शिकार बनाने वाले एक बड़े अंतरराज्यीय ठग गिरोह का भंडाफोड़ हुआ है। बिहार, झारखंड और मध्य प्रदेश जैसे विभिन्न राज्यों के युवाओं को मोटी तनख्वाह वाली नौकरी का झांसा देकर उनसे लाखों रुपये की ठगी करने वाले गिरोह के 6 शातिर सदस्यों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है।
इन फर्जी आयुर्वेदिक कंपनियों के नाम पर चल रहा था खेल
इस सनसनीखेज मामले का आधिकारिक खुलासा करते हुए कानपुर के पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल ने बताया कि पकड़े गए शातिर ठगों की पहचान रवींद्र यादव, कमलेश कुमार, रोहित शाव, मंगल शाक्य, राजू कुमार और संतोष पासवान के रूप में हुई है।
20-25 हजार की नौकरी का झांसा देकर वसूलते थे मोटी फीस
पुलिस कमिश्नर ने बताया कि पूछताछ में सामने आया है कि ये आरोपी युवाओं को शुरुआत में ही 20 से 25 हजार रुपये प्रति माह की आकर्षक नौकरी देने का लालच देते थे। जैसे ही कोई युवा इनके झांसे में आ जाता था, तो आरोपी उससे फाइल चार्ज, मेडिकल टेस्ट, सिक्योरिटी मनी और अनिवार्य रजिस्ट्रेशन के नाम पर 15 हजार रुपये से लेकर 30 हजार रुपये तक की रकम वसूल लेते थे।
भारी मात्रा में मोबाइल और ठगी से जुड़ी चैट बरामद, जांच जारी
पुलिस और साइबर सेल की संयुक्त टीम ने जब इन आरोपियों को घेराबंदी करके दबोचा, तो इनके पास से ठगी के धंधे में इस्तेमाल होने वाले 6 एंड्रॉइड मोबाइल फोन बरामद हुए हैं। इन मोबाइलों को जब साइबर विशेषज्ञों ने खंगाला, तो उसमें ठगी का शिकार हुए दर्जनों युवाओं के साथ की गई व्हाट्सएप चैट के अलावा कई महत्वपूर्ण ऑडियो रिकॉर्डिंग और वीडियो साक्ष्य के रूप में मिले हैं, जिससे इनके अपराध की पुष्टि होती है।