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Sikh Riots:  एसआईटी ने दो और आरोपियों को किया गिरफ्तार, दोहरे हत्याकांड के आरोपियों को नहीं मिली जमानत

Wed, 17 Aug 2022 05:23 PM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

कानपुर में वर्ष 1984 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद हुए दंगों में शहर में 127 सिखों की हत्या की गई थी। इस दौरान अर्मापुर एस्टेट में हुए दोहरे हत्याकांड और निरालानगर तिहरे हत्याकांड के आरोपियों को एसआईटी ने गिरफ्तार कर लिया है।
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गिरफ्तार आरोपी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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कानपुर सिख विरोधी दंगे की जांच में जुटी एसआईटी ने दो और आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इसमें अर्मापुर एस्टेट में हुए दोहरे हत्याकांड में हत्यारोपी उमाशंकर और निरालानगर तिहरे हत्याकांड में आरोपी वीरेंद्र सिंह गिरफ्तार किए गए। एसआईटी अब तक कुल 32 आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है।

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वहीं, सिख विरोधी दंगे में आरोपी विश्व बैंक बर्रा निवासी 75 वर्षीय दीपक और केडीए मार्केट नौबस्ता निवासी 85 वर्षीय राजन लाल पांडे की जमानत अर्जियां अपर जिला जज 17 विकास गोयल ने खारिज कर दी हैं। दोनों 12 जुलाई से जेल में हैं।
एडीजीसी संजय कुमार झा ने बताया कि किदवई नगर के ब्लॉक निवासी पुरुषोत्तम घर पर नामदेव जी का गुरुद्वारा चलाते थे। एक नवंबर 1984 को पुरुषोत्तम पत्नी सुरजीत कौर, मंझले भाई सर्वजीत सिंह, उसकी पत्नी कंवलजीत कौर, छोटे भाई सरदूल सिंह, माता अवतार कौर, पिता गुरुमुख सिंह, बहन सतवीर कौर व पाठ सुनाने आए एक अन्य सरदार गुरुदयाल सिंह के साथ गुरुद्वारे पर थे।
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उसी समय दंगाइयों ने हमला बोल दिया था। हॉल में मिट्टी का तेल व पेट्रोल डालकर आग लगा दी थी। सबका दम घुटने लगा था। दंगाइयों ने सरदूल सिंह के मुंह पर गद्दा बांधकर आग लगा दी थी। इसमें सरदूल और गुरुदयाल की मौत हो गई थी। मामले में 10 नामजद और 40 अज्ञात के खिलाफ नौबस्ता थाने में रिपोर्ट दर्ज हुई थी। इसी मामले में आरोपी दीपक और राजन लाल पांडे को गिरफ्तार किया गया था।
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