कानपुर। दो महीने के अंदर शहर में 27 हजार सिस्टेमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (एसआईपी यानी सिप) के खाते बंद हो गए हैं, जबकि सिर्फ 22 हजार नए खाते ही खुले हैं। लंबे समय बाद जनवरी-फरवरी में यह देखा गया है कि बंद होने वाले सिप खातों की संख्या नए खुले खातों से ज्यादा है। एसोसिएशन ऑफ म्युचुअल फंड इन इंडिया (एम्फी) की ताजा रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है। समझा जाता है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा चुनाव के दौरान और शपथ लेने से पहले की गईं घोषणाओं से बाजार में अस्थिरता आई है। ऐसे में निवेशक बाजार से अपनी पूंजी निकालना बेहतर समझ रहे हैं।
शहर के निवेशकों का यह रुझान प्रदेश और देश में भी देखा गया है। एम्फी के आंकड़ों के अनुसार, फरवरी में उत्तर प्रदेश का औसत एयूएम (एसेट अंडर मैनेजमेंट) 3.10 लाख करोड़ रुपये था। कानपुर की ही तरह जनवरी-फरवरी में सूबे में दो लाख नए सिप खाते खुले, जबकि करीब 2.50 लाख सिप बंद हो गए। यानी 50 हजार सिप खाते घट गए। देशभर में भी इस अवधि में 44.56 लाख नए सिप पंजीकृत हुए, जबकि 54.70 लाख सिप बंद कर हो गए। रिपोर्ट के अनुसार, सिप में ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिये शुरू किए खाते तेजी से बंद हो रहे हैं। इसकी वजह इन प्लेटफॉर्म्स पर निवेशकों को सही समय पर सलाह नहीं मिल पाना है। मतलब कि करीब 10 लाख सिप खाते देश भर में कम हो गए हैं। शहर की बात करें तो जनवरी-फरवरी में यहां का औसत एयूएम करीब 34,500 करोड़ रुपये था, जो देश के एयूएम का 0.51 प्रतिशत है।
म्युचुअल फंड में सिप के जरिये 15 दिन या महीने में निवेश किया जाता है। पहले निवेश की न्यूनतम 500 रुपये मासिक थी, जिसे बजट में घटाकर 250 रुपये महीने कर दिया गया है।
1- बाजार में अस्थिरता और गिरावट का डर। निवेश की गई पूंजी न डूब जाए, इसलिए लोग खाता बंद कर पैसा निकाल लेते हैं।
2. कुछ निवेशक मुनाफा वसूलने के लिए सिप बंद कर देते हैं। वे सोचते हैं कि अब और ज्यादा कमाई की गुंजाइश नहीं है।
3. अचानक आर्थिक तंगी खड़ी होने या नकदी की जरूरत पड़ने पर भी तो निवेशक अपकी एसआईपी बंद कर देते हैं।
4. ब्याज दरें बढ़ने पर अगर एफडी जैसे सुरक्षित निवेश साधनों पर ज्यादा रिटर्न मिलने लगे तो पैसा निकाल कर उसमें लगा देते हैं।
5. कुछ निवेशक जब अपने वित्तीय लक्ष्य (जैसे घर खरीदना, बच्चे की पढ़ाई) को हासिल कर लेते हैं, तब सिप को बंद कर देते हैं।
6. गलत योजना में पैसा लगाने के बाद निवेशक को अगर लगता है कि इससे उसका उद्देश्य पूरा नहीं होगा, तो वह खाता बंद कर देता है।
निवेशकों को सलाह
- बाजार की गिरावट में सिप न रोकें, लंबी अवधि के लक्ष्य को ध्यान में रखकर निवेश करें।
- अगर जरूरत हो तो किसी भरोसेमंद सलाहकार या डिस्ट्रीब्यूटर की मदद लें।
- एसआईपी को सिर्फ बाजार के रुझान से नहीं, अपने लक्ष्य के अनुसार जारी रखें।
अस्थिर बाजार को लेकर घबराहट
सिप बंद होने की बढ़ती रफ्तार बताती है कि निवेशकों में अस्थिर बाजार को लेकर घबराहट है। खासकर उन निवेशकों में जो बिना किसी मार्गदर्शन के ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए निवेश कर रहे हैं, जबकि सिप का असली फायदा तभी मिलता है जब आप गिरावट के समय भी निवेश जारी रखें। बाजार में गिरावट के दौरान खरीदे गए यूनिट्स ही भविष्य में अधिक रिटर्न देते हैं। - राजीव सिंह, को फाउंडर, केश्री ब्रोकिंग।
शेयर बाजार में गिरावट के कारण नए निवेशक वेट एंड वाच की रणनीति अपना रहे हैं। इंतजार कर रहे हैं कि जब बाजार में रिकवरी शुरू होगी तब निवेश करेंगे। हालांकि, बाजार में गिरावट के समय निवेश करना ज्यादा फायदेमंद होता है। अगर निवेश का नजरिया लंबी अवधि का है तो सिप के जरिये म्युचुअल फंड में निवेश हमेशा फायदेमंद होता है। - कृष्णा कुमार शुक्ला, म्युचुअल फंड डिस्ट्रीब्यूटर।