कानपुर। सिख समुदाय ने सोमवार को खालसा साजना दिवस हर्षोल्लास के साथ मनाया। जीटी रोड स्थित गुरुद्वारा भाई बन्नो साहिब में रागी जत्थों ने गुरुबाणी से कार्यक्रम की शुरूआत की। यहां अमृत पीवह सदा चिर जीवह, हर सिमरन आनंद अनंता... जैसे शबद सुनकर संगत निहाल हुई।
हजूरी रागी सतबीर सिंह ने खालसा साजना दिवस के बारे में बताया। उन्होंने बताया कि सिखों के दसवें गुरु गुरु गोबिंद सिंह जी ने आनंदपुर साहिब में खालसा पंथ की स्थापना की। उन्होंने पांच शिष्यों को पंज प्यारे के रूप में चुनकर सिंह की उपाधि दी। गुरुजी ने उन्हें अमृत छकाकर सिंह की उपाधि दी और फिर खुद भी उनसे अमृत ग्रहण किया। इसी दिन सिखों के लिए पांच अनिवार्य पहचान केश, कंघा, कड़ा, कछैरा और कृपाण निर्धारित किए। इसी दिन के बाद से सिखों के पुरुष सिंह और महिलाएं कौर कहलाईं।
दरबार साहिब अमृतसर से आए हजूरी रागी हरदीप सिंह ने भजन और कीर्तन प्रस्तुत किया। इस अवसर पर 28 लोगों को अमृत संचार करवाया गया। गुरुद्वारा प्रधान अजीत सिंह भाटिया ने बताया कि मंगलवार सुबह छह बजे कीर्तन और दर्शन होंगे साथ ही गुरु का लंगर भी परोसा जाएगा। इस मौके पर सुरिंदर जीत सिंह, जसवंत सिंह, परमजीत सिंह, लवली सिंह, कंवलबीर सिंह, अमरजीत सिंह, दलजीत सिंह और परविंदर सिंह सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
कीर्तन और कथा सुनकर संगत हुई निहाल
गोविंदनगर लेबर कॉलोनी स्थित गुरुद्वारा माता गुजरी में आयोजित दो दिवसीय कार्यक्रम में दीवान की शुरुआत रहिरास साहिब के पाठ से हुई। बाबा बकाला वाले सुखजीत सिंह और दरबार साहिब अमृतसर वाले गुरमुख सिंह और जसमीत सिंह ने कीर्तन और कथा से संगत को निहाल किया। आयोजक टीपी सिंह सोनू ने बताया कि मुख्य कार्यक्रम मंगलवार को होगा। सुबह और शाम को दीवान सजेंगे और गुरु का अटूट लंगर भी होगा। यहां राजिंदर सिंह जिंदी, बलबीर सिंह, रंजीत सिंह, कुलविंदर सिंह बख्शी, कंवलजीत सिंह और गुरदीप सिंह सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।
रतनलालनगर स्थित गुरुद्वारे में आयोजित गुरमत समागम में दूसरे दिन स्त्री सत्संग जत्थों ने कीर्तन से संगत को निहाल किया। मौके पर देश और दुनिया में खुशहाली के लिए प्रार्थना की गई। यहां गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के रविंद्र सिंह अरोड़ा, आनंद योगेश सचदेवा, त्रिलोक सिंह आदि शामिल रहे।