कानपुर। पितृ पक्ष श्राद्ध रविवार से शुरू हो गया। पहले दिन लोगों ने पितरों की आत्मा की शांति के लिए तर्पण किया। ज्योतिषाचार्य पवन प्रीति तिवारी ने बताया कि पितृ पक्ष में लोग अपने पितरों की आत्मा की शांति के लिए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करते हैं। तर्पण दक्षिण दिशा की ओर मुख करके जल में काले तिल, जौ और कुशा मिलाकर पितरों को तीन बार जल अर्पित कर किया जाता है।
उन्होंने बताया कि पिंडदान पके चावल, दूध, शहद और गंगाजल से गोल पिंड बनाकर पितरों को समर्पित किए जाते हैं। भोजन और दान दिया जाता है। गाय, कौए, कुत्ते और जरूरतमंदों को भोजन कराया जाता है। पीतल या फूल या कांसे की थाली में जल, गंगाजल, दूध, काले तिल और जौ लें पितरों का स्मरण करते हुए मंत्रों के साथ अंजलि से जल दें।
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श्राद्ध के दौरान यह न करें
- लहसुन, प्याज, मांस, मछली, अंडा, शराब का सेवन वर्जित है।
- बाल, शेविंग, नाखून काटने से बचना चाहिए।
- नए कार्य की शुरुआत करने से बचना चाहिए।
- घर में वाद-विवाद या लड़ाई-झगड़ा न करें।
- श्राद्ध का कार्य हमेशा दोपहर के समय करना चाहिए।