कानपुर देहात। सरकारी गेहूं खरीद केंद्रों पर बारदाना का टोटा होने से गेहूं खरीद की गति सुस्त है। हालात ये हैं कि आर्डर देने के बाद भी कानपुर की फैक्टरी से बारदाना की आपूर्ति नहीं हो सकी है। वैकल्पिक व्यवस्था में कोटेदारों से बारदाना मिलने में दिक्कत आ रही है। अब तक 30 से अधिक केंद्रों पर गेहूं खरीद की बोहनी नहीं हुई है। केवल 315 किसानों से ही गेहूं खरीदा जा सका है।
रबी विपणन वर्ष 2026-27 में जिले में पांच क्रय एजेंसियों के कुल 58 गेहूं क्रय केंद्र बनाए गए हैं। 27, 500 मीट्रिक टन गेहूं खरीद का लक्ष्य दिया गया है। 30 मार्च को क्रय केंद्र खुल गए थे। हालांकि बाद में बेमौसम बारिश हुई तो गेहूं की कटाई मड़ाई में देरी हुई। इधर अब बारदाना का टोटा खरीद में रोड़ा बना है। पहले गोरखपुर से बारदाना मंगवाने की पहल हुई लेकिन बात नहीं बनी। इसके बाद जिला स्तर से खरीद के क्रम में कानपुर की एक प्लास्टिक फैक्टरी से 500 गांठें प्लास्टिक का बारदाना मंगवाने का आर्डर दिया गया। मगर करीब 10 दिन से अधिक होने के बाद भी बारदाना खेप नहीं मिल सकी है।
कहा जा रहा है कि सोमवार से कानपुर की फैक्टरी से बारदाना की आपूर्ति शुरू की जाएगी। इससे सहूलियत बढ़ेगी। वहीं, मंडल स्तर से भी बारदाना आपूर्ति के लिए ठेकेदार तय किया गया है। इसमें कानपुर देहात को बारदाना की 250 गांठें मिलने की बात कही जा रही हे। हालांकि यह बारदाना भी सोमवार के बाद ही मिल पाएगा इसकी उम्मीद है। क्रय केंद्र प्रभारी भी संशय में हैं। बारदाना उपलब्ध न की वजह से गेहूं की सरकारी खरीद धीमी है। छह हजार से अधिक किसानों ने पंजीयन कराया है। करीब 28 केंद्रों पर केवल 315 किसानों से 2205 मीट्रिक टन गेहूं खरीदा गया है।
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कोटेदारों से नहीं मिल पा रहा अपेक्षित बारदाना
वैकल्पिक व्यवस्था के तहत कोटेदारों से अनाज वितरण के बाद बारदाना मांगा गया। हालांकि इसके एवज में कोटेदारों को कितना और कब भुगतान होगा यह साफ नहीं किया गया। कोटेदारों के सामने दिक्कत यह है कि निशुल्क राशन वितरण के बाद उनके पास इसी बारदाना को बेचकर जरूरत के रुपये का इंतजाम करने का जरिया होता है। अनाज गोदाम से आने और फिर कोटेदार तक पहुंचने में बारदाना हुक लगने से क्षतिग्रस्त भी हो जाता है। ऐसे में कोटेदारों से बारदाना मिलने की दिक्कत बनी है। अधिकारी दबाव बनाकर कोटेदारों से बारदाना का जुगाड़ कर रहे हैं लेकिन इससे कोटेदार भी नाखुश हैं और अपेक्षित बारदाना उपलब्ध नहीं हो पा रहा है।
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वर्जन.........
इरान व इस्राइल-अमेरिका युद्ध से बारदाना की समस्या हो गई है। पेट्रोलियम से ही प्लास्टिक बारदाना बनता है। लगातार प्रयास किया जा रहा है कि जरूरत का बारदाना उपलब्ध हो जाए। कानपुर की फैक्टरी से सोमवार से बारदाना आने की शुरुआत की उम्मीद है। वहीं मंडल स्तर पर हुई निविदा से भी बारदाना की आपूर्ति जल्द होने की उम्मीद है। - देवेंद्र कुमार, जिला खाद्य विपणन अधिकारी
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खुले बाजार में सस्ता बिक रहा गेहूं
हर साल खुले बाजार में गेहूं मूल्य एमएसपी के करीब होने से कम किसान ही सरकारी क्रय केंद्र पर गेहूं बेचने आते रहे हैं। बीते साल भी केवल 1952 किसानों से 9126.88 मीट्रिक टन गेहूं खरीदा जा सका था। इस बार खुले बाजार और न्यूनतम समर्थन में बड़ा अंतर है। बीते साल से 160 रुपये बढ़ाकर 2585 रुपये प्रति क्विंटल न्यूनतम समर्थन मूल्य तय किया है। अकबरपुर के रामकुमार, रूरा के शशांक आदि ने बताया कि उम्मीद थी कि सरकारी क्रय केंद्र पर गेहूं बेचकर फायदा होगा। बारदाना का टोटा होने पर सरकारी क्रय केंद्र पर गेहूं नहीं बेच पा रहे हैं। जरूरत पर उन्हें मजबूरी में आढ़तियों के यहां 22 सौ से 23 सौ रुपये तक में गेहूं बेचना पड़ रहा है।