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सावन विशेषः खेरेश्वरधाम की मान्यता, यहां हर सोमवार फूल चढ़ाता है चिरंजीवी अश्वत्थामा

Sun, 29 Jul 2018 08:19 AM IST
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
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डेमो पिक
कहा जाता है सबकी आंखों से बचकर हजारों सालों से जिंदा वो ‘अमर महामानव’ सावन के हर सोमवार को सबसे पहले महादेव को जल चढ़ाकर गायब हो जाता है। गांववालों का दावा है कि वो अमर महामानव अश्वत्थामा है। जो अचानक तेज रौशनी के साथ प्रकट होता है, खड़ाऊं की आवाजें आने लगती हैं और फिर अचानक सन्नाटा छा जाता है।
 
आगे की स्लाइड में पढ़ेंः- अपराजित और अमर है अश्वत्थामा...
 
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खेरेश्वर धाम मंदिर शिवलिंग
यूपी के कानपुर में एक ऐसा शिव मंदिर बना हुआ है जो आज पूरे देश में अश्वत्थामा की वजह से काफी चर्चित है। वही अश्वत्थामा जिन्हें संपूर्ण महाभारत के युद्ध में कोई हरा नहीं सका था। मान्यता है कि वह आज भी अपराजित और अमर हैं।

आगे की स्लाइड में पढ़ेंः- शिवराजपुर गांव में बना है खेरेश्वर धाम मंदिर...
 
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खेरेश्वर धाम मंदिर
कानपुर के शिवराजपुर गांव के पास बने खेरेश्वर धाम मंदिर में सबसे पहले पूजा करने खुद अश्वत्थामा आते हैं। गांवववालों का दावा है कि वो अमर महामानव अश्वत्थामा है। जो अचानक तेज रौशनी के साथ प्रकट होता है, खड़ाऊं की आवाजें आने लगती हैं और फिर अचानक सन्नाटा छा जाता है।
 
आगे की स्लाइड में पढ़ेंः- तेज रोशनी के साथ कहीं ओझल हो जाता है...

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खेरेश्वर धाम मंदिर
कानपुर से 40 किलोमीटर दूर शिवराजपुर गांव के लोगों का दावा है कि वे 36 पीढ़ियों से एक ऐसे इंसान को देख रहे हैं जो आठ फुट लंबा है। नजदीक जाने पर ये इंसान तेज रौशनी के साथ कहीं ओझल हो जाता है।  मंदिर के महंत, पुजारी और गांव वालों का ऐसा दावा है कि सावन के पहले सोमवार के दिन खेरेश्वर मंदिर में सबसे पहले खुद अश्वत्थामा महादेव को जल चढ़ा गए हैं।

आगे की स्लाइड में पढ़ेंः- आस्था से जुड़ा विषय या कुछ और...
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डेमो पिक
शिवलिंग के आसपास पानी की छीटें भी पड़ी हैं। हालांकि इसे कुछ लोग केवल आस्था से जुड़ा एक विषय ही मानते हैं। खेरेश्वर मंदिर में भोलेनाथ के दर्शन करने पहुंचे अधिकतर भक्तों ने इस घटना को सही बताया है। इसकी प्रमाणिकता अभी तक नहीं हो पाई है कि अश्वत्थामा क्या वाकई में जिंदा है। 
 
आगे की स्लाइड में पढ़ेंः- पौराणिक मान्यता के अनुसार 8 चिरंजीवी...
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खेरेश्वर धाम मंदिर
भारतीय पौराणिक मान्यता अनुसार आठ चिरंजीवी- बलि, वेदव्यास, हनुमान, विभीषण, कृपाचार्य, मारकण्ये ऋषि, परशुराम, अश्वत्थामा हैं। इन सभी का सुबह-सुबह स्मरण करने से बीमारियां दूर होती हैं और मनुष्य सौ वर्षों तक जीता है। द्रोणाचार्य अपने पुत्र अश्वत्थामा से बहुत प्रेम करते थे।

आगे की स्लाइड में पढ़ेंः- लोग अश्वत्थामा को देव के रूप में पूजते हैं...
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खेरेश्वर धाम मंदिर
शस्त्रों से संबंधित गुप्त रहस्य अश्वत्थामा ने अपने पिता से ही सीखे थे। खेरेश्वर धाम से करीब 100 मीटर की दूरी पर अश्वत्थामा का मंदिर भी बना है। गांव के लोग अश्वत्थामा को देव के रूप में पूजते हैं।
 
आगे की स्लाइड में पढ़ेंः-सफेद लिबास में लंबा चौड़ा इंसान...
 

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खेरेश्वर धाम मंदिर
मंदिर के आसपास रहने वाले पुजारी केशव प्रसाद शुक्ल, सरस्वती देवी और मधुबाला ने बताया कि उन्होंने कई बार सफेद लिबास में लंबे चौड़े इंसान को मंदिर आते-जाते देखा है। कुछ पूछने पर वह नहीं बोलता और तेज रोशनी के साथ गायब हो जाता है।  

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मंदिर में भगवान शिव नित्य दर्शन करने आने वाले गोविन्द अवस्थी का कहना है कि यह सिद्ध मंदिर है। यहां पर जो शिवलिंग है उसको किसी ने स्थापित नहीं किया है वो स्यम्भू

शिवलिंग है। इस मंदिर के आसपास गाय चराने वाले चरवाहे आते थे उनकी गाय एक नियमित रूप से एक खास जगह पर अपना दूध निकाल देती थी जिससे सभी हैरान थे।
 
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डेमो पिक
जिस जगह गाय अपना दूध निकालती थी, जब वहां खुदाई की गई तो वहां पर एक अद्धभुत शिवलिंग मिली। इस मंदिर में अश्वत्थामा आते हैं लेकिन किसी ने उनको देखा नहीं है। सुबह जब मंदिर के पट खोले जाते है तो शिवलिंग पर अद्धभुत फूल और कुछ ऐसी चीजें मिलती हैं जो आम आदमी के वश के बाहर हैं।
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