पुरवामीर गांव में रक्षाबंधन के दिन आंगन की धरती में समाई 18 वर्षीय यशी का शव जब शनिवार दोपहर करीब 2 बजे पोस्टमार्टम के बाद गांव पहुंचा तो पूरे गांव में चीत्कार मच गई। सैकड़ों ग्रामीणों की आंखें नम हो गईं। जिस आंगन में यशी चहकती, कूदती और खेलती बड़ी हुई थी, वही आंगन उसकी मौत की वजह बन गया। इस हृदयविदारक घटना ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है।
यशी ने रक्षाबंधन पर अपने इकलौते भाई भास्कर से जिद की थी कि कई महीनों बाद आ रहे हो तो इस बार दो-चार दिन रुक कर जाना, नहीं तो मैं बात नहीं करूंगी। बिलखते हुए भाई ने कहा - मुझे क्या पता था कि मेरी बहन हमेशा के लिए मुझे छोड़कर चली जाएगी। बहन अनूपा ने रोते हुए बताया कि हादसे से कुछ देर पहले ही सुबह यशी कह रही थी - भैया ने नया महंगा मोबाइल लिया है, इस बार आएंगे तो खूब सारी फोटो खींचेंगे, बहुत अच्छी फोटो आएंगी। दोपहर करीब 3 बजे नजफगढ़ गंगा घाट पर नम आंखों से उसका अंतिम संस्कार किया गया।