कानपुर। आश्विन मास की पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा कहा जाता है। इस बार सोमवार होने से उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र ध्रुव योग बन रहा है जो धन वर्षा करेगा। शरद पूर्णिमा का व्रत रखकर लक्ष्मी का पूजन करना चाहिए। मान्यताओं के अनुसार, चंद्रमा से अमृत बरसता है।
पंडित दीपक पांडे ने बताया कि भारतीय ज्योतिष के अनुसार इंद्रदेव का भी ध्यान किया जाता है। महिलाएं व्रत रख कर ब्राह्मणों को भोजन कराती हैं और कथा सुनती हैं। शरद पूर्णिमा को मां लक्ष्मी ऐरावत हाथी पर पृथ्वी लोक में भ्रमण करती हैं। इस रात्रि में जगराता करने से मां लक्ष्मी की कृपा का लाभ मिलता है। मां लक्ष्मी का शृंगार कर पूजा-अर्चना और जागरण-कीर्तन करें। शरद पूर्णिमा की चांदनी रात में खीर खुले में रखें और दूसरे दिन सुबह इसे अमृत स्वरूप ग्रहण करें। बंगाली समाज में शरद पूर्णिमा का विशेष महत्व है।
108 दीपक प्रज्वलित करें
भारतीय ज्योतिष के अनुसार जो लोग शरद पूर्णिमा को व्रत रखते हैं। चंद्रमा व मां लक्ष्मी की पूजा करने के साथ रात में जागरण करते हैं। उन्हें आर्थिक लाभ मिलता है। कर्ज से मुक्ति के लिए इस दिन 108 दीपक प्रज्वलित करें।