घरों में हजरत कासिम की मेहंदी सजाई गई
जुलूस में बैंड से मातमी धुनें बजाई गईं। इसमें ऊंट भी शामिल रहे। भैंसा ठेलों पर रखी देगों से खीर, जर्दा वितरित किया गया। लोग नोहाख्वानी करते रहे। वहीं घरों में हजरत कासिम की मेहंदी सजाई गई। मलीदा और फलों पर फातिहा दिलाई गई। मेहंदी के जुलूस में अंजुमन मोहम्मदी मोइनुल अजा के बैनर तले नोहाख्वानी हुई।
खेमों में पानी खत्म, हर तरफ अल अतश-अल अतश
शिया शहर काजी मौलाना हामिद हुसैन ने बताया कि आठवीं मोहर्रम को कर्बला में और सख्ती बढ़ गई। अहले बैत, असहाब और अंसार के खेमों में पानी बिल्कुल खत्म हो गया। इसके साथ ही खाने का सामान भी नहीं रहा। पानी न होने से खेमों में हर तरफ अल अतश (प्यास)-अल अतश (प्यास) की आवाज गूंजने लगी।
खेमों को चारों तरफ से घेरे रखा था
बच्चे प्यास के मारे बिलबिला रहे थे। बड़ों ने तो पहले से ही पानी नहीं पिया था। जो थोड़ा-बहुत पानी बच्चों के लिए छोड़ रखा था, वह भी खत्म हो गया। दरिया फुरात पर यजीदियों ने फौजियों की संख्या बढ़ा दी। फौजी नदी के किनारे दीवार बनकर खड़े हुए थे, जो कोई भी पानी के लिए गया उसे भगा दिया। खेमों को चारों तरफ से घेरे रखा था, जिससे किसी मददगार के खेमों तक पहुंचने के लिए राह नहीं थी।
रियायत बरतने से फौजियों को मना किया था
कर्बला के मैदान में आठवीं मोहर्रम की रात लश्कर को और बढ़ा दिया गया। उमर इब्ने साद के अलावा हुर, सिम्र और यजीदी फौज के दूसरे कमांडर कर्बला में डेरा डाले हुए थे। कूफे के कमांडर उबैदुल्लाह ने इमाम आली मकाम और उनके साथियों के साथ किसी भी तरह की रियायत बरतने से फौजियों को मना किया था। सारी रात खेमों में बातचीत का दौर चला। इमाम हुसैन ने स्थिति पर अपने साथियों से बात की।
बगाही में 60 साल से दफन हो रहे ताजिये
बगाही कर्बला के मुतवल्ली अकीश शानू ने बताया कि बगाही कर्बला बाबूपुरवा में शहर के दक्षिणी इलाके के मोहल्लों से उठने वाले ताजिये दफन होते हैं। यहां 60 साल से लोग ताजिये दफन कर रहे हैं। कर्बला में जूही लाल कालोनी, सफेद कालोनी, रत्तूपुरवा, परमपुरवा, ढकना पुरवा, सुजातगंज, मुंशीपुरवा, बाबूवुरवा से उठने वाले ताजिये आते हैं।