पकड़े गए आरोपियों के बारे में जानकारी देते एसपी अमित कुमार
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रांची से तस्करी कर बरेली ले जाया जा रहा सात क्विंटल डोडा एसटीएफ लखनऊ और हरदोई जिले की सुरसा थाने की पुलिस ने घेराबंदी कर पकड़ लिया। पुलिस ने दो लोगों को गिरफ्तार किया है। बरामद हुए डोडा की कीमत अंतर्राष्ट्रीय बाजार में एक करोड़ रुपये से अधिक बताई गई है।
पुलिस अधीक्षक अमित कुमार ने बताया कि एसटीएफ लखनऊ के उपनिरीक्षक मनोज पांडेय को जानकारी मिली थी कि एक कैंटर में सात क्विंटल 14 किलो डोडा बोरियों में भरकर रखा गया है। इस कैंटर के रांची से चलकर बरेली पहुंचने की जानकारी भी मिली थी।
मंगलवार शाम साढ़े पांच बजे जैसे ही कैंटर हरदोई-लखनऊ मार्ग पर सुरसा थाना क्षेत्र में पचकोहरा तिराहे के निकट पहुंचा, सुरसा के प्रभारी निरीक्षक राजकरन शर्मा ने कैंटर को रुकवा लिया। तलाशी के दौरान कैंटर में प्लास्टिक की 38 बोरियों में सात क्विंटल 14 किलो डोडा बरामद हुआ।
ट्रक से नसरुद्दीन पुत्र शमसुल मियां निवासी टइया थाना पाकीपकरिया जनपद पलामू, झारखंड और भारत सिंह, कालीचरन निवासी परेवा कुइयां थाना भुता जनपद बरेली को गिरफ्तार कर लिया गया। दोनों को जेल भेज दिया गया। एसपी ने बताया कि बरेली जनपद के ग्राम परेवा कुइयां निवासी इस्लाम पुत्र अब्दुल खां और उसका भाई अकरम इस अवैध कारोबार में लिप्त हैं।
दोनों को इस मामले में आरोपी बनाया गया है और इन्हें गिरफ्तार करने की कोशिश की जा रही है। एसपी अमित कुमार ने बताया कि गिरफ्तार नसरूद्दीन और भारत सिंह ने बताया कि सात फरवरी को खाली कैंटर रांची गया था। भारत सिंह कैंटर चलाकर रांची गया था।
वहां इस्लाम ने 40 हजार रुपये भाड़ा तय कर एक अन्य चालक नसरूद्दीन को भाई अकरम का मोबाइल नंबर दिया। खुद ट्रेन से बरेली पहुंचने की बात कही। डोडा भरी बोरियों को छिपाने के लिए खाली कैरट भी लाद दिए गए थे। एसटीएफ को इसकी भनक लग गई और तस्करी का माल बरामद हो गया।
30 सितंबर 2019 को भी दर्ज हुई थी रिपोर्ट
एसटीएफ लखनऊ, देहात कोतवाली पुलिस और सर्विलांस टीम की संयुक्त कार्रवाई में 30 सितंबर 2019 को भी एक डीसीएम से 25 क्विंटल डोडा बरामद किया गया था। इस मामले में भी अकरम पुत्र अब्दुल खां निवासी परवे कुइयां थाना भुता जनपद बरेली का नाम प्रकाश में आया था। तब दर्ज कराई गई एफआईआर में भी अकरम को आरोपी बनाया गया था, लेकिन इसके बावजूद अकरम की गिरफ्तारी नहीं हो पाई और उसने तस्करी का कारोबार भी बंद नहीं किया।
अफीम के फल से बनता है डोडा
सुरसा के प्रभारी निरीक्षक राजकरन शर्मा ने बताया कि अफीम के फल के छिलके और डंठल को ही डोडा कहा जाता है। इसकी बिक्री पूरी तरह प्रतिबंधित है। अफीम की खेती करने वाले किसानों को भी स्पष्ट निर्देश हैं कि डोडा सीधे सरकार को ही दिया जाएगा। डोडा का इस्तेमाल नशीले पदार्थ के रूप में किया जाता है। आमतौर पर इसे चाय में मिलाकर या पानी में उबालकर पिया जाता है।